Wednesday , September 27 2017
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नोटबंदी: इलाज के लिए बैंक के चक्कर काट रहे पूर्व सैनिक को नहीं न मिले पैसे तो खुद को गोली मार की आत्महत्या

उत्तर प्रदेश: नोटबंदी के कारण अब तक देश में 100 से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी हैं और अभी भी ये आंकड़े यहीं थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। लोग बैंकों और एटीएम के आगे लगी लंबी-लंबी कतारों में खड़े-खड़े मौत के घाट के उत्तर चुके हैं। इस सिलसिले में एक और मामला सामने आया है। आगरा के रहने वाले पूर्व सैनिक राकेश चंद ने बैंक से कैश न मिल पाने के कारण आत्महत्या कर ली है।

राकेश अपने इलाज के लिए आगरा के के ताजगंज स्थित एसबीआई बैंक की ब्रांच से पैसे निकलवाने के लिए रोज लाइन में लग रहे थे लेकिन उन्हें कैश नहीं मिल पा रहा था। जिससे परेशान होकर उन्होंने अपनी लाइसेंसी बंदूक से अपने घर में खुद कर गोली मार ली। जब गोली चली तो आवाज़ सुनकर परिवार वाले वहां आ गए और देखा की वह वहां खून से सने पड़े थे उन्हें अस्पताल लेकर गए जहाँ डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

राकेश चंद के बेटे सुशील चंद ने बताया की नोटबंदी के बाद उनके घर पर पैसों की काफी दिक्कत हो गई थी। पिता जी के इलाज के लिए भी पैसे नहीं थे औए बैंक से पैसे निकल नहीं रहे थे और एटीएम कार्ड भी ब्लॉक हो गया था। वह पैसे निकालने के लिये बैंक के चक्कर रोज लगा रहे थे। मैंने बैंक वालों को बताया था कि मेरे पिता जी काफी बीमार हैं और सीआरपीएफ से रिटायर्ड हैं। उन्हें इलाज की सख्त जरूरत है लेकिन बैंक वालों उन्हें फिर भी पैसे नहीं दिए।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के मुताबिक सुशील ने बताया कि उनके पिता सीआरपीएफ में हेड कांस्टेबल थे और उन्होंने साल 2012 में वॉलेंट्री रिटायरमेंट ली थी। ऊके पिता ने बारामुला में साल 1990 में हुए हमले के दौरान अपने सीने पर पांच गोलियां खाई थीं। जिसके बाद से उन्हें हार्ट सम्बन्धी दिक्कतों का इलाज चल रहा था। नोटबंदी के बाद से उनके इलाज के लिए रकम की कमी होने लगी थी।

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