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नोटबंदी : किसी को फांसी मिली या सत्ता से बेदखल हो गए तो किसी ने फैसले को ही वापस लिया

सियासत हिंदी, रांची : नोटबंदी की वजह से किसी ने किसी वजह से अभी तक भारत देश में लगभग 40 मौंते होने की खबरें आ रही है. लाखों ट्रक कैश की किल्लत से हाइवे पर ही पड़ी हैं. जिसकी वजह से खद्यान की किमतें जोर पकड़ने लगी है. लोग दिन में ऑफिस या काम पर जा रहे हैं तो रात में पैसों के लिए एटीएम के बाहर कतार पर खड़े होकर अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं.

आखिर ये फैसला देश के हित में है भी या नहीं ये तो वक्त बताएगा, पर इतना जरूर है कि इतिहास में या गुजिश्ता सदी में दुनिया में कालाधन या अर्थव्यवस्था के के नाम पर नोटबंदी फ्लाप ही रही, ये तो वक्त ही बतायेगा की हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले से देश का भला होगा या उनका, या फिर जाे गुजिश्ता सदी कुछ देशों के हुकमरानों के साथ जो हुआ वाे फिर इस देश में न हो.

नोटबंदी की वजह से कुछ देशों के हुकमरानों को फांसी तक दे दी गई . तानाशाह मोब्तु सेसे बैंक नोट में सुधार के नाम पर कई चीज़ों को अमल में लाए थे. 1993 में सिस्टम से अप्रचलित मुद्रा को वापस लेने की योजना थी. इसका नतीजा यह हुआ कि महंगाई बढ़ गई और डॉलर के मुक़ाबले वहां की करेंसी में भारी गिरावट आई थी. 1997 में एक सिविल वार के बाद मोबुतु सत्ता से बेदखल हो गए थे.

नाइजीरिया में मुहम्मद बुहारी के नेतृत्व वाली सैन्य सरकार ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कदम उठाते हुए नए बैंक नोट अलग रंग में जारी किए थे. नाइजीरिया का यह कदम बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुआ था और महंगाई के साथ अर्थव्यवस्था की सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ था. इसके बाद बुखारी को तख्तापलट के कारण सत्ता से बेदखल होना पड़ा था.

2010 में उत्तर कोरिया के तत्कालीन नेता किम जोंग-इल ने अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने और कालाबाज़ारी पर लगाम लगाने के लिए 1000 नोट को वापस लिया था. उस वक्त वहां खेती संकट के दौर से गुजर रही थी और कोरिया खाद्य संकट का सामना कर रहा था. इस क़दम से उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था और बुरी तरह से प्रभावित हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक इसी को लेकर सत्ताधारी पार्टी के वित्त प्रमुख को फांसी दे दी गई थी.

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