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नोटबंदी की वजह से पाकिस्तान के राजनयिकों ने सैलरी लेने से मना किया, जानिये क्यों

आम जनता के सामने कई मुश्किले खड़ी कर रही नोटबंदी अब भारत-पाकिस्तान के बीच राजनयिक तनाव की वजह भी बन गई है। द इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राजनयिकों को तनख्वाह अमेरिकी डॉलर में निकालने की सुविधा दी जाती है इस पर कोई आयकर भी नहीं लगता।हालांकि इसके लिए भारत में नियम है कि 5,000 डॉलर तक का वेतन बिना कोई दस्तावेज पेश किए निकाला जा सकता है। इससे ज्यादा रकम निकालने के लिए उसके इस्तेमाल के उद्देश्य से संबंधित दस्तावेज देने होते हैं। लेकिन अब चूंकि नोटबंदी के वजह से देश में डॉलर की मांग काफी बढ़ गई है और उसकी कमी भी हो गई है, इसलिए बैंक इसके भुगतान में आनाकानी कर रहे हैं।तनाव की यह स्थिति ऐसे समय बनी है जब अमृतसर में हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन होने वाला है और पाकिस्तान के विदेश सलाहकार सरताज अजीज उसमें आने वाले हैं।

अखबार ने सूत्रों के हवाले बताया है कि आरबीएल बैंक (इसमें पाकिस्तानी राजनयिकों के वेतन खाते हैं) ने पाकिस्तानी उच्चायोग को तीन तरह के विकल्प दिए हैं. पहला- डॉलर में तनख्वाह निकालने के लिए राजनयिक इसके इस्तेमाल के उद्देश्य के संबंध में दस्तावेज पेश करें (भले ही रकम पांच हजार डॉलर या उससे कम ही क्यों न हो)। दूसरा- वे अपनी तनख्वाह भारतीय मुद्रा में ले लें (डॉलर की विनिमय दर के हिसाब से यह रकम देने के लिए बैंक तैयार है)। तीसरा- वे अपनी तनख्वाह पाकिस्तान के बैंकों में मौजूद खाते में स्थानांतरित करा लें। लेकिन पाकिस्तानी राजनयिकों ने इन तीनों ही विकल्पों को खारिज कर दिया है।

इस संबंध में पाकिस्तानी उच्चायोग ने भारतीय विदेश मंत्रालय के सामने तो आपत्ति जताई ही है, अपने देश के विदेश विभाग को भी पूरी स्थिति से अवगत कराया है। दूसरी तरफ, आरबीएल बैंक ने भी विदेश मंत्रालय को बताया है कि उसके पास डॉलर की कमी है, इसलिए वह इस मुद्रा में पाकिस्तानी राजनयिकों को तनख्वाह देने में सक्षम नहीं है। उधर, पाकिस्तानी उच्चायोग का मानना है कि डॉलर की कमी का सिर्फ बहाना है और दोनों देशों के बीच तनाव की वजह से जानबूझकर राजनयिकों को निशाना बनाया जा रहा है।

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