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नोटबंदी के ख़िलाफ़ 28 नवम्बर को देशव्यापी आंदोलन करेगी AAP

नई दिल्ली: मोदी सरकार के 8 लाख़ करोड़ रुपए के नोटबंदी घोटाले के ख़िलाफ़ आम आदमी पार्टी आगामी 28 नवम्बर को देशव्यापी आंदोलन करेगी। नोटबंदी घोटाले के ख़िलाफ़ आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता देशभर के सभी ज़िला मुख्यालयों पर इकठ्ठा होकर प्रदर्शन करेंगे।

प्रेस कॉंफ्रेस में बोलते हुए आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशीष खेतान ने कहा कि “मोदी सरकार के 8 लाख़ करोड़ रुपए के नोटबंदी घोटाले के ख़िलाफ़ आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल अगले 4 हफ्तों में पूरे देशभर में 6 बड़ी रैलियां करेंगे और देश की जनता को बताएंगे कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता और ग़रीब आदमी का पैसा लूट कर बड़े-बड़े उद्योगपतियों में बांट रह हैं”

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आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशीष खेतान ने साथ ही कहा कि “मोदी सरकार के 8 लाख करोड़ के इस नोटबंदी घोटाले के ख़िलाफ़ इन सभी रैलियों के माध्यम से आम आदमी पार्टी देश की जनता के बीच निम्नलिखित 7 सवाल लेकर जाएगी
इनकम टैक्स विभाग द्वारा सहारा और बिरला के ऑफिस पर मारे गए छापों में ज़ब्त डायरियों से मिली जानकारी के अनुसार इन उद्योगपतियों की तरफ़ से 40 करोड़ 10 लाख रुपए की रिश्वत तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री और वर्तमान में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को देने की बात सामने आई थी। क्या इनकम टैक्स के उन ज़ब्त कागज़ों के आधार पर इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए या नहीं?
पिछले एक साल में मोदी सरकार ने कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के 1 लाख 14 हज़ार करोड़ के कर्ज़े माफ़ किए हैं, क्या यह सही कदम है?
नोटबंदी के बाद जनता ने अपनी मेहनत की कमाई से बैंकों में जो तकरीबन 7 लाख़ करोड़ रुपए जमा किए हैं, उस पैसे से क्या बड़े-बड़े उद्योगपतियों के लोन माफ़ कर देने चाहिए? हां या नहीं?
देश के जिन चुनिंदा उद्योगपतियों ने सरकारी बैंकों से 8 लाख़ करोड़ रुपए का लोन ले रखा है जिसे वो बैंकों को वापस नहीं चुका रहे हैं। क्या प्रधानमंत्री जी को उद्योगपतियों से यह बकाया कर्ज़ वसूलने का मज़बूत कदम उठाना चाहिए या नहीं?
भारत सरकार के पास 648 लोगों की वो सूची मौजूद है जिनका कालाधन स्विस बैंकों में जमा है। क्या प्रधानमंत्री जी को ऐसे लोगों की वो सूची सार्वजनिक करनी चाहिए या नहीं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के अनुसार ही तकरीबन 80 लाख़ करोड़ रुपए का कालाधन विदेशी बैंकों में जमा है। क्या प्रधानमंत्री जी को यह रकम वापस भारत लाने और उस कालेधन रखने वाले भारतीय खाता धारकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए या नहीं?
नोटबंदी के 7 दिन बाद ही स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने देश के कुछ चुनिंदा लोगों का तक़रीबन 7 हज़ार करोड़ रुपया माफ़ कर दिया था जिसमें 1200 करोड़ रुपया भगौड़े विजय माल्या का भी है जो इस वक्त लंदन में बैठकर मज़े कर रहा है। क्या सरकार का यह कदम सही है या नहीं? (प्रेस रिलीज़)

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