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नोटबंदी के चलते कारोबारियों के 10 हजार करोड़ डुबे, अगले दो साल तक भरपाई मुश्किल

नोटबंदी के चलते जहां आम आदमी को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है वहीं करेंसी की किल्लत से उद्योग-धंधे बुरी तरह ठप हो गए हैं। खासकर छोटे उद्योगों का उत्पादन सिमट कर तीस से चालीस फीसदी के बीच रह गया है। अब तक छोटे अद्योगों को दस हजार करोड़ रुपये का नुकसान का अंदाजा लगाया जा रहा है।

उद्यमियों का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में स्थिति फिलहाल नहीं ठीक होने वाली। इस नुकसान की भरपाई अगले दो साल तक पूरी होना मुश्किल है। उद्यमियों ने सरकार से मांग की है कि उनके बैंकों के ब्याज माफ किए जाएं।  बैंक की लिमिट 25 फीसदी तक बढ़ाई जाए और एनपीए की सीमा 90 की बजाए 180 दिन किया जाए।

फेडरेशन ऑफ स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (फासी) के चेयरमैन बदीश जिंदल का कहना है कि हालत यह है कि उद्यमियों के पास रोजमर्रा के ख़र्च चलाने के भी पैसे नहीं हैं।  बैंकों में कैश की भारी किल्लत है। घंटों लाइन में लगने पर भी रकम नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में मुश्किल से तीस फीसदी उत्पादन हो पा रहा है। पंजाब के छोटे उद्योगों को अब तक दस हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। यह स्थिति अभी सुधरने की कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही है।

फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल आर्गेनाइजेशन (फिको) के चेयरमैन एवं नीलम साइकिल्स के एमडी केके सेठ बताया कि नोटबंदी के बाद इंडस्ट्री पूरी तरह से  पटरी से उतर गया है। नीलम साइकिल्स का टर्नओवर तकरीबन 250 करोड़ का है। खर्च चलाने के लिए रोजाना कम-से-कम दो लाख रुपये की जरूरत है। इतना कैश मिल नहीं रहा है। ऐसे में उत्पादन कम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।  वहीं पंजाब कॉटन फैक्टरीज एंड जिनर्स एसोसिएशन के प्रधान भगवान बांसल ने बताया कि सीजन के दिन में करेंसी की किल्लत के चलते उत्पादन ठप है। ऐसे में औद्योगिक उत्पादन लगातार गिर रहा है।

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