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नोटबंदी के ठीक पहले बीजेपी नेताओं ने बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी!

प्रधानमंत्री की नोटबंदी की घोषणा के ठीक पहले बीजेपी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदीं। ये खुलासा किया है कैच न्यूज ने। कैच न्यूज अपनी एक रिपोर्ट में वो सभी दस्तावेज पेश किये जिससे ये साबित होता है भाजपा ने बड़े पैमाने पर योजनाबृद्ध तरीके से जमीनों की खरीद-फरोख्त अंजाम दिया। इन जमीनों की कीमत करोड़ों रुपए में है। अकेले बिहार राज्य से मिले दस्तावेज बताते हैं कि पार्टी ने अगस्त महीने के बाद से लेकर नवंबर महीने के पहले हफ्ते तक करोड़ों रुपए की ।जमीनें अलग-अलग जिलों में खरीदीं गई।
भाजपा द्वारा खरीदी गई जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े ये दस्तावेज बिहार सरकार की भूमि जानकारी संबंधी वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं। भाजपा ने ये संपत्तियां अपने कार्यकर्ताओं के नाम पर खरीदी हैं। इनमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की ओर से पार्टी के सीनियर कार्यकर्ता और विधायकों को सिग्नेटरी बनाया गया है।

कैच न्यूज ने पूरे दस्तावेज पेश किया है। लिंक देखिये।

http://www.catchnews.com/india-news/bjp-bought-land-worth-crores-just-before-note-ban-1480019920.html/fullview

संजीव चौरसिया इन तमाम खरीद में सिग्नेटरी हैं। वो वर्तमान में दीगा विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी हैं। चौरसिया और पार्टी के एक अन्य नेता ने भी कैच से बातचीत में स्वीकार किया कि पार्टी ने हाल के दिनों में बड़ी मात्रा में जमीनों की खरीद-फरोख्त की है। चौरसिया ने बताया कि पार्टी ने बिहार के साथ ही देश भर में जमीनें खरीदी हैं। ये जमीनें पार्टी कार्यालय और पार्टी के तमाम दूसरे कामों के लिए ली गई हैं।
कैच न्यूज से बातचीत करते हुए संजीव चौरसिया ने स्वीकार किया कि पार्टी ने हाल के दिनों में पार्टी के काम के लिए जमीनों की खरीद-फरोख्त की है।
चौरसिया ने कहा, ‘सब जगह खरीदा जा रहा था। बिहार के साथ और भी जगह जमीन खरीदा जा रहा है… हम लोग तो सिर्फ सिग्नेटरी अथॉरिटी हैं, पैसा तो पार्टी की तरफ से आया था… सारी जमीन खरीदी है पार्टी कार्यालय के लिए और अन्य कामों के लिए. नवंबर के फर्स्ट वीक तक जमीन खरीदी है।

 

यह पूछे जाने पर कि खरीददारी नगद हुई या चेक के जरिए? चौरसिया कहते हैं, ‘पार्टी का काम एक नंबर से होता है। नगद लेनदेन नहीं हुआ होगा। हालांकि पार्टी के एक अन्य नेता और सिग्नेटरी लाल बाबू प्रसाद ने बिहार के एक स्थानीय चैनल से बातचीत में स्वीकार किया है कि उन लोगों ने जमीनें नगद पैसे से खरीदी हैं, इसके लिए पार्टी कार्यकर्ताओं ने चंदा दिया है।

पार्टी ने बिहार के तमाम शहरों और कस्बों मसलन मधुबनी, मधेपुरा, कटिहार, किशनगंज, अररिया, अरवल, लखीसराय आदि में जमीनें खरीदीं।

पार्टी द्वारा खरीदी गई जमीनों की साइज आधा एकड़ से 250 वर्गफीट के बीच है। इनकी कीमत 8 लाख से 1.16 करोड़ के बीच है। सबसे महंगी जमीन करीब 1100 रुपए प्रति वर्ग फीट की दर से खरीदी गई है।

जमीनें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से बिहार भाजपा के जनरल सेक्रेटरी संजीव चौरसिया ने लखीसराय में 60.13 लाख रुपए में एक जमीन खरीदी।

संजीव चौरसिया- महासचिव भाजपा, बिहार इकाई. डीड में उनका पता है 11, अशोक रोड, राष्ट्रीय मुख्यालय, भाजपा।

लाल बाबू प्रसाद- उपाध्यक्ष, भाजपा बिहार इकाई. इनका पता है. गांव, आर्य समाज रोड, नरकटियागंज, पीएस नरकटियागंज, पश्चिमी चंपारण।

दिलीप कुमार जायसवाल- कोषाध्यक्ष, भाजपा बिहार इकाई. एक दस्तावेज में इनका पता है, पूरबपाली रोड, पीएस, जिला किशनगंज. एक अन्य दस्तावेज में उनका पता 11, अशोक रोड दर्ज है।

कुछ मामलों में भाजपा खुद ही खरीददार पार्टी है और पता 11 अशोक रोड दर्ज है।

नोटबंदी के ठीक पहले बिहार में बड़े पैमाने पर आनन फानन तरीके जमीन खरीदना सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है। संदेह ये भी होता है कि क्या सरकार ने नोटबंदी के फैसले के बाद नुकसान से बचाने के लिये बीजेपी के नेताओं को आगाह कर दिया था।

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