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नोटबंदी के बाद जमा 500 और 1000 रुपये की संख्या बताने की मांग: कांग्रेस

नई दिल्ली: विपक्षी दलों कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने आज सरकार से यह जानना चाहा कि आखिर नोटबंदी करने बैंकों में जमा किया 500 और 1000 रुपये के नोटों की संख्या छिपाने की कोशिश सरकार‌ क्यों कर रही है। लोकसभा में कंपनियों के संशोधन विधेयक 2016 पर जारी चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के वी थॉमस ने कहा कि देश में नोटबंदी करने के बाद से 8 महीने हो चुके हैं लेकिन रिजर्व बैंक ने अब तक यह नहीं बताया कि 10 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच निषिद्ध मुद्रा कितनी संख्या में एकत्र हुई है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया वास्तविक संख्या बताने से परहेज कर रही है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद स्वागता राय ने भी इस समस्या को उठाते हुए कहा कि हम नोटबंदी के बाद जमा नोटों की संख्या जानना चाहते हैं। अंत आज तक बैंकों में कितनी राशि जमा हुई है। आरबीआई गवर्नर अपने बैंक में जमा राशि की संख्या बताने में असमर्थ हैं।

आखिर ऐसा क्यों छुपा रही है। थॉमस ने कहा कि सरकार ने नोटबंदी का तो घोषणा इससे काला धन पर काबू पाने, आतंकवाद विरोधी और नकली मुद्रा के चलन को रोकने में मदद मिलेगी, यहाँ तक तो ठीक है लेकिन सरकार बैंकों में जमा राशी को दिखाने से परहेज क्यों कर रही है। आठ महीने तो बीत चुके हैं और सरकार ने अभी तक काला धन कितना जमा किया है।

आखिर सरकार इसे छुपा क्यों रही है। संसदीय समिति ने कई बार आरबीआई गवर्नर से मुलाकात की और वह हर बार यही कह रहे हैं कि हम अब तक गिनती कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि आर्थिक रूप से हम किस स्थान पर खड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को देश भर में 500 और 1000 रुपये के नोटों के चलन को बंद करने की घोषणा की थी और पुराने नोट रखने वालों से कहा था कि वह 30 दिसंबर तक 50 दिवसीय राहत से लाभ कर बैंकों में अपनी जमा पूंजी जमा करा दीं।

अनुमान लगाया गया था कि पुरानी मुद्रा लागत 15 लाख करोड़ रुपये होगी। नोटबंदी के द्वारा सरकार 15 लाख करोड़ प्रस्तुत करेगी लेकिन सरकार का कहना है कि आरबीआई बैंकों में जमा किये गये पुरानी मुद्रा की संख्या का अब तक अनुमान कर रही है। 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करते हुए काले धन पर काबू पाने के लिए की घोषणा की थी लेकिन यह काला धन प्रदर्शित किया गया और न ही रिश्वत पर काबू पाया गया।

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