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नोटबंदी के विरोध में मुंडवाया सिर, जब तक मोदी सत्ता से बाहर नहीं होते नहीं रखूंगा बाल

तिरुवनंतपुरम :  केंद्र सरकार के नोटबंदी के ऐलान के बाद से ही कुछ लोग इसका समर्थन कर रहे हैं जबकि कुछ लोग विरोध | लेकिन अगर हक़ीक़त देखी जाए तो नोटबंदी की वजह से लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है | बैंकों और एटीएम के बाहर कई कई घंटे लाइन में लगने पर भी पैसा नहीं मिल पा रहा है | लोगों को रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करनी भी मुश्किल हो रही है |

जनसत्ता की एक खबर के मुताबिक़ इन  सब परेशानियों की वजह से केरल के कोल्लम के रहने वाले याहिया ने नोटबंदी के विरोध का एक अनूठा तरीक़ा अपनाया है | कोल्लम में छोटा-सा होटल और चाय की दुकान चलाने वाले याहिया ने आधा सिर मुंडवा लिया है | उन्होंने क़सम खायी है कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बाहर नहीं कर दिया जाता है तब तक मैं अपने बाल नहीं रखूँगा |

अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में केरल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ अशरफ कदक्कल ने इस बारे में बताया है | उन्होंने बताया कि क्यों याहिया ने अपना आधा सिर मुंडवा दिया है और कैसे नोटबंदी के चलते याहिया को परेशानी का सामना करना पड़ा |

प्रोफेसर  ने शख्स के हवाले से लिखे अपने  फेसबुक पोस्ट में बताया कि – मेरा नाम याहिया है, मेरी उम्र 70 साल के करीब है और मैं केरल के कोल्लम जिले का रहने वाला हूं |  मैं अपनी पत्नी और दो लड़कियों के साथ रहता हूं|  पहले मैं पेड़ से नारियल तोड़ने और खेती काम करता था जब मुझे लगा है कि मैं अपनी बेटी की शादी नहीं कर पाऊंगा तो मैंने सबकुछ बेचकर गल्फ जाने का फैसला किया|  मुझे वहां बहुत परेशानियाँ भी हुई | लेकिन  किसी तरह थोड़ा बहुत जमा किया उसे लेकर वापस आ गया है| अपनी बेटी की शादी उन पैसों और बैंक से लोन लेकर की | मैं खुद अपना पूरा होटल संभालता हूं, सारे काम खुद करता हूं | मैं आराम से काम कर सकूं इसलिए नाइट पहनता हूं। मेरे पास 23,000 रुपए के पुराने नोट थे। मैंने इन्हें एक्सचेंज करने के लिए बैंक गया और दो दिन लाइन खड़ा में रहा।
उन्होंने आगे लिखा- दूसरे दिन बैंक की लाइन में खड़े रहने के दौरान मेरा शुगर लेवल कम हो गया और मैं लगभग गिर गया। कुछ अच्छे लोगों ने मेरी मदद की और मुझे अस्पताल पहुंचाया। मेरे ऊपर को-ऑपरेटिव बैंक का लोन है, इसके लिए मेरे पास कोई खाता नहीं है। को-ऑपरेटिव में सारे ट्रांजेक्शन बंद होने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं अपने पैसे कहीं भी नहीं जमा कर पाऊंगा। पाई-पाई जोड़कर बचाए अपने पैसे के लिए मैं कितने दिन तक लाइन में खड़ा रहता। मैंने अस्पताल से घर आने के बाद चूल्हा जलाया और सारे पैसे जला दिए। इसके बाद मैं नाई की दुकान गया और मैने अपना आधा सिर मुंडवा दिया। जब तक मेरी मेहनत और बचत को राख में मिलाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बाहर नहीं कर दिया जाता है और इस देश को बचा नहीं लिया जाता तब तक मैं अपने बाल वापस नहीं रखूंगा|

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