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नोटबंदी: लोगों की मार से बीजेपी में बना डर का माहौल, कहीं लोग न हो जाए “आउट ऑफ़ कंट्रोल”

उत्तर प्रदेश: नोटबंदी का ऐलान करते वक़्त देश के प्रधामंत्री मोदी ने कहा था की पचास दिन की तंगी है उसके बाद हालात सामान्य हो जायेंगे। जिसके चलते काफी लोग और मोदी समर्थक खुश थे। लेकिन अब आलम ये हैं की मोदी समर्थकों के साथ आरएसएस और बीजेपी से जुड़े संगठन भी इससे परेशान हो गए हैं।

हाल ही में आरएसएस, वीएचपी, बजरंग दल और एबीवीपी के सदस्यों ने बीजेपी नेतृत्व को आगाह किया है की अगर नोटबंदी से हुई कैश की समस्या जल्द ही हल न हुई तो उत्तर प्रदेश चुनावों ने इसका नतीजा भारी हो सकता है। जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़ेगा।

इंडिया डॉट कॉम के अनुसार, सभी सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्र का फीडबैक लेकर ये मैसेज अमित शाह तक पहुंचा चुके हैं। उनका कहना है कि पहले लोग मोदीजी का समर्थन कर रहे थे लेकिन कैश के लिए बैंक के आगे लगी कटारे कम नहीं बल्कि कैश की कमी होने के कारण बढ़ रही हैं। लोग अब गुस्से में आ गए हैं। जल्द ही कुछ करना होगा नहीं तो यूपी चुनाव की तारिख भी आगे करनी पड़ सकती है नहीं तो पैसों की ये कमी राजनीतिक रूप से विनाशकारी साबित हो सकती है। सांसदों द्वारा कई बैठके की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के एक सांसद ने नाम सामने न आने की शर्त पर कहा कि, “मोदीजी ने कहा था की 50 दिनों में हालात सामान्य हो जायेंगे लेकिन बैंक और एटीएम के बाहर लगी लाइनों से बिलकुल नहीं लगता की हालात सुधर रहे हैं। 50 दिनों के बाद हम मतदाताओं से क्या कहेंगे? यह चिंता का विषय है।”
पार्टी के एक सांसद ने खुलकर स्वीकार किया, “मैं मार खाना नहीं चाहता हूं। पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा लोगों के पास जाने और सरकार के नोटबंदी के फैसले का प्रचार करने की लगातार अपील के बावजूद सांसद और लोकल नेता लोगों की नाराजगी झेलने को तैयार नहीं हैं।

बीजेपी किसान मंच ने भी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को नोटबंदी के कारण किसानों को भारी नुकसान का हाल बयां किया है। कैश न होने के कारण किसान बुवाई ही नहीं कर पाए हैं। बीजेपी युवा शाखा ने महसूस किया कि शहरों के मुकाबले गाँव में परेशानी ज्यादा है।

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