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नोट बैन के साइडइफेक्ट : अरबपति को मांगनी पड़ी भिखारी से मदद

बैंगलोर : 500 और 1000 रुपए के नोट बंद कर दिए जाने के बाद दिल्ली के एक अरबपति को एक ऐसा मौका आया जब मांगनी पड़ी भिखारी से मदद। दिल्ली के एक अरबपति, जो दिल्ली में तीन जाने माने क्लबों के मालिक हैं, ने सुबह आंख खोली तो खुद को बिना केश के गरीब पाया। वे कहते हैं, मेरी बैंगलोर में एक फैक्टरी है। जिसे मैंने लीज़ पर दे रखा था। इसमें कुछ काम चल रहा था तो फैक्टरी बंद थी। मुझे मजदूरों को 90,000 रुपए देने थे। मेरे पास कई बैंकों में करोड़ों रूपए हैं। उस समय मेरे पास हाथ में सिर्फ एक 100 रुपए का नोट था और बाकी 500 और 1000 रुपए के कई बेकार हो चुके नोट मेरे एक कर्मचारी ने अपने क्रेडिट कार्ड से बैंगलोर का एक टिकिट बुक कराया।

मैं फैक्टरी के पास 10 किलोमीटर एरिए में भटका। मेरे पास एक भी पैसा नहीं था कि मैं टैक्सी कर सकूं और एप आधारित टैक्सी सर्विस कैश मांग रही थी। फिर मेरे एक दोस्त का आइडिया जो पहले मजाक लग रहा था अचानक से मुझे सही रास्ता नजर आने लगा। क्यों ना ऐसे लोगों से मदद ली जाए जिनके पास चेंज होता है.

अब इन्होंने एक लोकल भिखारी रेकेट के प्रमुख से संपर्क किया। काफी मिन्नतों के बाद, यह भिखारी डॉन पुराने 500 और 1000 रुपए के नोटों के रूप में 2.5 लाख रुपए के बदले में इन्हें 90,000 रुपए के छुट्टे पैसे पर राजी हुआ। यह पैसा उन्हें 5, 10, 20, 50 और 100 रुपए के नोटों के रूप में मिला। यह पैसा मिलने के बाद, अरबपति की खुशी का ठिकाना न रहा। उनका कहना है कि पैसा देखकर उन्हें जीवन में इतनी खुशी कभी नहीं हुई।

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