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नौजवानों के मुस्तक़बिल के लिए बेहतर तर्बीयत और कौंसलिंग की ज़रूरत

हैदराबाद २‍‍४ अप्रैल (सियासत न्यूज़ )मिल्लत के बेहतर मुस्तक़बिल केलिए मुनज़्ज़महिक्मत-ए-अमली और मंसूबा बंदी की ज़रूरत है । नौजवान नसल में इंतिज़ामी सलाहीयतों को उभारते हुए मिल्लत के मुस्तक़बिल को बेहतर बनाया जा सकता है । प्रोफ

हैदराबाद २‍‍४ अप्रैल (सियासत न्यूज़ )मिल्लत के बेहतर मुस्तक़बिल केलिए मुनज़्ज़महिक्मत-ए-अमली और मंसूबा बंदी की ज़रूरत है । नौजवान नसल में इंतिज़ामी सलाहीयतों को उभारते हुए मिल्लत के मुस्तक़बिल को बेहतर बनाया जा सकता है । प्रोफ़ैसर अशर्फ़रफ़ी ने इन ख़्यालात का इज़हार करते हुए कहा कि मुस्लमानों की सूरत-ए-हाल को बेहतर बनाने के लिए ये ज़रूरी है कि हम अग़यार के मंसूबों पर नज़र रखते हुए अपनी हिक्मत-ए-अमली तैय्यार करें ।

उन्हों ने नौजवानों को मसह बिकती इम्तिहानात बिलख़सूस इंतिज़ामी शोबों की सिम्त राग़िब करवाने की ज़रूरत परज़ोर देते हुए कहा कि इंतिज़ामी उमूर में मुस्लिम नौजवानों की तादाद बढ़ाना वक़्त की अहम ज़रूरत है । प्रोफ़ैसर अशर्फ़ रफ़ी ने मिल्लत-ए-इस्लामीया मैं इत्तिहाद पैदा करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि सयासी तौर पर मुस्लमानों को मुस्तहकम बनाने केलिए इन में सयासी शऊर बिलख़सूस इंतिख़ाबी शऊर बैदा रकरने की ज़रूरत है । उन्हों ने भारतीय जनता पार्टी की हिक्मत-ए-अमली कोमंसूबा बंद क़रार देते हुए कहा कि बी जे पी अपने मुफ़ादात के हुसूल के लिए बेहतरीन हिक्मत-ए-अमली तर्तीब देते हुए सयासी तौर पर मुस्तहकम होने की कोशिश कर रही है ।

इसी तरह मुस्लमानों को भी अपने सयासी वजूद का एहसास दिलाने केलिए मुस्तहकम लायेहा-ए-अमल तर्तीब देते हुए आगे बढ़ना चाहीए । मुस्लमान तालीमी और सयासी सतह पर मुस्तहकम होने के बाद ही एक ज़िंदा क़ौम के तौर पर अपनी शनाख़्त बना सकते हैं चूँकि जिन अक़्वाम ने तालीम से दूरी इख़तियार की वो अक़्वाम ज़िल्लत-ओ-रुसवाई का शिकार हुई हैं इसी लिए मुस्लमानों को चाहीए कि वो अपने वजूद को मनवाने के लिए उन्हें हासिल मवाक़े से फ़ायदा हासिल करें और अपनी तालीमी पसमांदगी को दूर करते हुए सयासी तौर पर मुस्तहकम बनने की मंसूबा बंदी करें ।

प्रोफ़ैसर अशर्फ़ रफ़ी ने बताया कि इंतिज़ामी उमूर में मुस्लिम नौजवानों की भर्ती सरकारी सतह पर मुस्लमानों की नुमाइंदगी की मुतरादिफ़ साबित होगी । इसी लिए आई ए ऐस ,आई पी ऐस वग़ैरा में मुस्लिम नौजवानों को दाख़िल करवाने के लिए उन्हें तैय्यार करवाईं ता कि सरकारी उमूर में भी मुस्लमानों की रसाई शामिल रहे । नौजवानों में सलाहीयतों में इज़ाफ़ा करने के लिए उन की बेहतर तर्बीयत और कौंसलिंग की जानी चाहीए ताकि वो मिल्लत-ए-इस्लामीया का ताबनाक मुस्तक़बिल साबित हो सकें।

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