Wednesday , October 18 2017
Home / India / नौजवानों को हक़ राय दही का बहरहाल इस्तेमाल करना चाहीए

नौजवानों को हक़ राय दही का बहरहाल इस्तेमाल करना चाहीए

अहमदाबाद, २० नवंबर (पीटीआई) हिंदूस्तान के हर बालिग़ होने वाले वोटर की जब अपने हक़ राय दही के इस्तेमाल की बारी आती है तो वो शश-ओ-पंज (संकोच व उधेड़ बुन) में मुबतला हो जाते हैं। उन्हें राय दही का तजुर्बा नहीं होता और उम्मीदवार के इंतिख़ाब मे

अहमदाबाद, २० नवंबर (पीटीआई) हिंदूस्तान के हर बालिग़ होने वाले वोटर की जब अपने हक़ राय दही के इस्तेमाल की बारी आती है तो वो शश-ओ-पंज (संकोच व उधेड़ बुन) में मुबतला हो जाते हैं। उन्हें राय दही का तजुर्बा नहीं होता और उम्मीदवार के इंतिख़ाब में भी उन्हें चाबुकदस्ती हासिल नहीं होती।

इन ही मुश्किलात के हल के लिए इलेक्शन कमीशन ने ख़ुसूसी तौर पर नौजवान वोटर्स के लिए बेदारी का प्रोग्राम मुनज़्ज़म करने का फ़ैसला किया है। नए वोटर्स में ऐसे नौजवान भी हैं जिन का कहना है कि वो बदउनवान ( Corrupted/भ्रष्ट) उम्मीदवारों को वोट देना नहीं चाहते जबकि एक तबक़ा ऐसा भी है जो हक़ राय दही को अपना बुनियादी हक़ और वोटिंग को एक ज़िम्मा दाराना फे़अल समझता है लिहाज़ा अब इलेक्शन कमीशन आफ़ इंडिया सिस्टामेटिक वोटर्स एजूकेशन ऐंड इलेक्ट्रॉल पारटीसीपेशन (SVEEP) नामी प्रोग्राम शुरू करने का बीड़ा उठाया है ताकि नौजवान वोटर्स को उन के हुक़ूक़ से आगाह किया जा सके।

याद रहे कि SVEEP का आग़ाज़ 2009‍ में हुआ था जिसका मक़सद इलेक्शन से मरबूत तमाम उमोर से नौजवान वोटर्स को आगाह करना था। इस प्रोग्राम के ज़रीया ख़ुसूसी तवज्जा नौजवान वोटर्स पर दी गई है ताकि वो अपने इस जमहूरी हक़ का मुनासिब इस्तेमाल कर सकें।

नौजवान तबक़ा इलेक्शन के रोज़ भी तातील ( छुट्टी) मनाने के मूड में रहता है और घर से बाहर निकल कर पोलिंग बूथ तक जाने की ज़हमत भी गवारा नहीं करता। इलावा अज़ीं कालेज और यूनीवर्सिटीज़ में ज़ेर-ए-तालीम नौजवानों तक ख़ुसूसी तौर पर ख़वातीन को भी इंतिख़ाबी हुक़ूक़ से वाक़िफ़ करवाने सेमीनार्स, वर्कशॉप्स और लेक्चर्स का एहतिमाम किया जाएगा।

दरीं असना अहमदाबाद के 25 साला जीत पटेल जो कि एक ज़ेर-ए-तरबीयत वकील हैं, ने कहा कि वोटिंग इस लिए एहमीयत की हामिल है क्योंकि ये हमारे बुनियादी हुक़ूक़ में से एक है। हक़ राय दही का अगर इस्तेमाल ना करें तो मुल्क के हालात में कोई तबदीली नहीं आएगी।

वोटिंग के ज़रीया ही मुल्क में इन्क़िलाब लाया जा सकता है। जीत पटेल, पहली बार अपने हक़ राय दही का इस्तेमाल करेंगे। गुज़श्ता मौक़ा पर वो अपने हक़ राय दही का इस्तेमाल ना कर सके थे क्योंकि राय दहिंदगान की जो फ़हरिस्त तैयार की गई थी, इस में बेशुमार गलतीयां थीं जिस की वजह से वो वोटिंग से महरूम रह गए थे।

TOPPOPULARRECENT