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पंजाब इलेक्शन में फिल्म “उड़ता पंजाब” ने सियासी रंग को बिगाड़ा

विवादों में घिरी फिल्म उड़ता पंजाब ने अब वो राजनीतिक रंग ले लिया है जिसमे घिरकर फिल्म की रिलीज से ज्यादा बात नेताओं और राजनीतिक दलों की आपसी लड़ाई पर आकर उलझ गई है। पंजाब में नशे के दलदल में फंसे युवाओं पर आधारित उड़ता पंजाब पर सेंसर की कैंची से भड़के अनुराग कश्यप और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेट यानी सीएफबीसी के डायरेक्टर पहलाज निहलानी के बीच चल रहे आरोप आग में घी डाल रहे हैं। लेकिन पंजाब में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले ये बात जरूर साफ हो रही है कि राज्य में ड्रग्स का मुद्दा किस हद तक राजनीतिक रंग लेगा।

दरअसल अपने नाम और कहानी को लेकर यह फिल्म रिलीज से पहले ही काफी चर्चा में थी। सेंसर बोर्ड के बाद अपील ट्रिब्यूनल ने फिल्म से पंजाब शब्द हटाने का आदेश दिया और विवाद शुरू हो गया। अनुराग कश्यप ने कहा की सूचना और प्रसारण मंत्रालय को दखल देना चाहिए और वो इस बात से निराश हैं कि मंत्री उनकी सुनवाई नहीं कर रहे। जवाब में सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौर ने कहा की फिल्म मेकर्स को ट्रिइब्यूनल में जाने का अधिकार है क्योंकि मंत्रालय या सरकार का इससे लेना-देना नहीं।

लेकिन चुनाव से ठीक 8 महीने पहले रिलीज के लिए अटकी उड़ता पंजाब को विवादों में घिरना ही था क्योंकि फिल्म की थीम यानी राज्य में नशे की लत वो मुद्दा है जिसे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस सत्ताधारी अकाली बीजेपी के खिलाफ इस्तेमाल करती रही है। सरकार के सूत्र भी इस बात से इनकार नहीं कर रहे कि फिल्म पर लड़ाई अब राजनीतिक है। सूत्रों का कहना है कि नशे की समस्या सिर्फ पंजाब ही नहीं बल्कि पूरे भारत में है इसलिए सिर्फ पंजाब को केंद्र में रखकर फिल्म बनाना सही नहीं है।

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