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पटना बम ब्लास्ट: आइबी ने खोली नीतीश की पोल

बिहार की दारुल हुकूमत पटना में नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली के दौरान हुए सिलसिलेबार बम धमाकों पर खुफिया ब्यूरो (आइबी) ने वज़ीर ए आला नीतीश कुमार के दावों की पोल खोल दी है। नीतीश कुमार के पहले इत्तेला न मिलने के दावे को सिरे से खारिज क

बिहार की दारुल हुकूमत पटना में नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली के दौरान हुए सिलसिलेबार बम धमाकों पर खुफिया ब्यूरो (आइबी) ने वज़ीर ए आला नीतीश कुमार के दावों की पोल खोल दी है। नीतीश कुमार के पहले इत्तेला न मिलने के दावे को सिरे से खारिज करते हुए खुफिया ब्यूरो ने मोदी की हुंकार रैली पर हमले के अलर्ट वाला खत भी जारी कर दिया है। यह अलर्ट 23 अक्टूबर को जारी किया गया था। बीजेपी लीडर अरुण जेटली ने भी नीतीश कुमार पर हमले के लिए इस अलर्ट का सहारा लिया।

इसके बाद राजगीर में जदयू के रियासती सतह पर चिंतन शिविर में नीतीश कुमार ने आफीसरो को अरुण जेटली के इल्ज़ामात को संजीदगी से लेने को कहा है। नीतीश ने कहा, ‘जेटली एक जिम्मेदार शख्स हैं। मैंने आफीसरों को उनके इल्ज़ामात की जांच करने को कहा है।’ वज़ीर ए आला ने यह भी कहा कि उन्होंने इतवार को धमाकों के बाद रियासत के ओहदेदारान के आफीसरो से मिली इत्तेला की बुनियाद पर बयान दिया था।

वज़ारत ए दाखिला के ज़राये के मुताबिक , पटना के धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन के भटकल ग्रुप का हाथ होने के इशारे मिले हैं। खुफिया ब्यूरो की ओर से 23 अक्तूबर को मोदी की रैली के लिए खासतौर पर अलर्ट जारी किया था, जिसमें इसी दहशतगर्द तंज़ीम का हाथ होने का शक जताया गया था। ज़राये का कहना है कि बिहार और झारखंड में इंडियन मुजाहिदीन की सरगर्मी के बारे में रियासत की इंतेज़ामिया को मुसलसल अलर्ट किया जाता रहा है। ऐसे में पटना में मोदी की रैली से पहले हुए धमाकों ने दहशतगर्द से लड़ने की बिहार की हुकूमत और इंतेज़ामिया की सलाहियत और सोच पर भी तमाम सवाल उठा दिए हैं।

इस बीच, पूरे मामले की जांच कर रही एनआइए ने बिहार पुलिस के कामकाज पर नाराजगी जताई है। खासतौर पर बरामद जिंदा बमों को नकारा करने के तरीके पर उसने एतराज जताया है। क्योंकि इससे कई तरह के अहम सुबूत खत्म हो गए। 7 जुलाई को बोधगया में भी इसी तरह के धमाके किए गए थे, जिसमें अब तक कोई अहम सुराग नहीं मिल पाया है। खुफिया ज़राये के मुताबिक बिहार और झारखंड में लंबे वक्त से सरगर्म इंडियन मुजाहिदीन जांच एजेंसियों के रडार पर है। लेकिन रियासत की पुलिस इंतेज़ामिया के नकारापन की वजह से चार महीने के अंदर मुसलसल दूसरी बड़ी वारदात मोदी की रैली के दौरान करने में दहशतगर्द कामयाब रहे। इससे बिहार में इस दहशतगर्द तंज़ीम की जड़ों के मजबूत होने के इशारे हैं। लेकिन बिहार पुलिस के मायूसकुन रवैये से दहशतगर्दों का हौसला बढ़ा है।

हालांकि, पटना धमाके में शामिल दो दहशतगर्दो की पहचान हो गई है। एक दहशतगर्द को लोगों ने पकड़ लिया तो दूसरा धमाके में मारा गया। इनके मार्फत जांच एजेंसियां दहशतगर्द तंज़ीम को खंगाल सकती है। लेकिन इंडियन मुजाहिदीन के एक जैसे माड्यूल नहीं होने से दहशतगर्द तंज़ीम का पर्दाफाश करना आसान नहीं होगा। वज़ारत ए दाखिला के ज़राये का कहना है कि रियासत की पुलिस इंतेज़ामिया की तरफ से ऐसे मामलों में ज़रूरत के मुताबिक मदद नहीं मिल पाती है।

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