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पनाह गुज़ीनों की आमद यूरोप पर “अरबों का हमला” – पोप फ्रांसिस

कैथोलिक मसीहीयों के रुहानी पेशवा पोप फ्रांसिस के ताज़ा बयान ने यूरोप का रुख करने वाले अरब पनाह गुज़ीनों को मिर्ज़ा ग़ालिब के इस शायर का मिस्दाक़ बना दिया है:
इस सादगी पे कौन ना मर जाए ए ख़ुदा… लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं!

ना तो कोई तारिक़ बिन ज़ियाद और ना ही उनका ये क़ौल “तुम्हारे पीछे समुंद्र और सामने दुश्मन है” यहां तक कि पानी पर कोई एक बहरी जहाज़ या कश्ती भी नहीं जलाई गई।

लाखों अरब और मुसलमान पनाह गुज़ीनों पर मुश्तमिल ये कैसी फ़ौज है जो यूरोप पर ख़ुशवज़ा इन्सानी हथियार की शक्ल में हमला आवर है जब कि मैदान-ए-जंग में ख़ून का एक क़तरा भी नहीं टपका। पोप फ्रांसिस की पापाई अंदाज़ में “ज़बान से फिसली” बात ने मीडिया की सुर्ख़ीयों में जगह बना ली।

पोप फ्रांसिस ने पनाह गुज़ीनों की बड़ी तादाद में यूरोप आमद को बर्रे आज़म पर “अरबों का हमला” क़रार दिया। उन्होंने ये बात बाएं बाज़ू से ताल्लुक़ रखने वाले कैथोलिक फ़्रांसीसियों से ख़िताब करते हुए कही जो उनसे मुलाक़ात के लिए आए थे।

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