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पर्सनल लॉ के मामले में मुसलमानों को फ़िक्र करने की जरूरत नहीं: क़ानूनविद् मजीद मेमन

मुंबई: प्रमुख क़ानूनविद् और राज सभा के सदस्य मजीद मेमन ने कल ला कमीशन के अध्यक्ष बीएस चौहान के साथ अपनी बैठक के संदर्भ में आज देश के मुसलमानों से अपील की है कि वह मुस्लिम पर्सनल ला में हस्तक्षेप, तीन तलाक रद्द करने और समान नागरिक कोड के मामले में धैर्य से काम लें क्योंकि न्यायमूर्ति चौहान ने यह आश्वासन दिया है कि सरकार या सुप्रीम कोर्ट का मुसलमानों के शरीयत (कानून) में हस्तक्षेप का कोई इरादा नहीं है।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार श्री मजीद मेमन ने आज यहां मुम्बई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि ला कमीशन के अध्यक्ष न्यायमूर्ति चौहान ने स्पष्ट शब्दों में यह बात बताई है कि सुप्रीम कोर्ट ने ला कमीशन को कोई आदेश नहीं दिया है बल्कि अटॉर्नी जनरल कमीशन से इस सवाल पर उसकी राय जानना चाहते हैं कि एक बार में तीन तलाक की कानूनी स्थिति क्या है? श्री मेमन ने कहा कि ला कमीशन के प्रश्न के कारण देश के मुसलमानों में बेचैनी फैली हुई है, लेकिन न्यायमूर्ति चौहान ने बताया कि जिन प्रश्नों को चर्चा में लाने के लिए और राय जानने के लिए इंटरनेट सहित विभिन्न स्रोतों से जनता तक पहुँचाया गया है इन सवालों में अगर मुसलमानों को आपत्ति है तो एक अन्त्रिम प्रश्नावली भी जारी किया जाएगा।
श्री मेमन के अनुसार न्यायमूर्ति चौहान ने यह भी कहा है कि मुसलमान प्रश्नावली का जवाब देने के लिए मजबूर नहीं हैं और उसे प्रश्नावली पर आपत्ति दर्ज करने की भी खुली छूट है. मेमन ने धैर्य से काम लेने की सलाह देते हुए ला कमीशन के प्रमुख का उस आश्वासन का भी उल्लेख किया कि मुसलमानों को उस पर विश्वास रखना चाहिए कि आने वाले दिनों में इस नाजुक मामले पर मुसलमानों की सहमति और संतोषजनक स्वीकृति के बिना कोई भी कदम नहीं उठाया जाएगा।

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