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पश्चिम बंगाल: धूलागढ़ हिंसा के बाद पंगु हुई अर्थव्यवस्था

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के हावड़ा ज़िले में स्थित धूलागढ़ में कुछ दिनों पहले हुई सांप्रदायिक हिंसा के पश्चात यहाँ की अर्थव्यवस्था पंगु हो गई है। इस हिंसा में अनेक घरों और दुकानों को जलाया दिया गया था तथा बमों से भी हमले किये गए थे। यह घटना 13 दिसम्बर को ईद-उल-नबी की जुलूस को लेकर हुई थी।

पश्चिम बंगाल सरकार के आँकड़ों के अनुसार हावड़ा में करीब 350 विभिन्न कार्यात्मक इकाई हैं जिसमे से करीब 100 धूलागढ़ में हैं। यहाँ हुई हिंसा और आगजनी के बाद एक पखवाड़े के बाद अधिकतर घर और लघु एवम मध्यम उद्यम बंद हैं। यहाँ के कई परिवार 13 दिसंबर और 14 पर हुई झड़पों के बाद फरार हो गए, कुछ हिन्दू इस सप्ताह लौट आए। अधिकांश मुस्लिम इलाके अभी भी सुनसान हैं। जिले के अधिकारियों ने बताया कि 100 से अधिक घरों और दुकानों पर उन दो दिनों में हमला किया गया। एक अधिकारी ने बताया कि अधिकतार हिंदू घरों और दुकानों पर हमला किया गया लेकिन वित्तीय नुक्सान मुस्लिमां के स्वामित्व वाले कारखानों को हुआ है।

हावड़ा ग्रामीण पुलिस अधीक्षक, सुमित कुमार ने कहा कि वहाँ 56 गिरफ्तारियां की गई है। हिंसा 14 दिसंबर को हुई थी और उसके बाद से हालात शांतिपूर्ण हो गए है। पहले से ही 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने पर एक बड़ा झटका लगा, जिससे इस क्षेत्र में कई इकाइयां हिंसा के बाद बंद पड़ी हैं। स्थानीय अधिकारियों और इकाई मालिकों के अनुसार, कच्चे माल को जला दिया गया और श्रमिकों को बेरोजगार छोड़ दिया है। एक कारखाने के मालिक ज़ाकिर सरदार ने बताया हावड़ा की इन इकाई में 9 हज़ार से अधिक कर्मचारी थे तथा प्रत्येक इकाई में औसतन 5 लाख की मशीनरी और उपकरण का निवेश था। यह वो जगह है जहाँ दोनों समुदाय के लोग समान संख्या में रहते थे। इनमे मुसलमानों की इकाइयों को ही निशाना बनाया गया। उनकी इकाई में 40 लोग कार्य करते थे जिसको हिंसा के दौरान निशाना बनाया गया। एक अन्य इकाई मालिक शेख अलाउद्दीन के अनुसार उनकी इकाई को काफी नुकसान हुआ है जो करीब एक करोड़ तक है।

एक अन्य इकाई मालिक अलीमा बेगम ने बताया कि इस हिंसा के बाद तटबंदी के कारण काम करने वालों को भुगतान करने के लिए उनके पास पुराने नोट थे जिससे वो कर्मचारी अब हमारा साथ छोड़ गए हैं। उनके ग्राहकों ने बिल रोक रखा है.

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