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पहले से तय था डोरंडा में 28 सितंबर की रात का दंगा

रांची : डोरंडा के गौसनगर में 28 सितंबर की रात फायरिंग के बाद जो दंगा भड़का था, वह पहले से तय था। यह जानकारी पुलिस को तहक़ीक़ात के दौरान मिली है। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि वाकिया की रात गौसनगर में पहले से कुछ लड़के बैठे हुए थे और उनके पास असलाह भी थे। उनकी तरफ से ईंट-पत्थर जमा कर रखे गये थे। असलाह के साथ मौजूद नौजवानों ने अचानक दंगा भड़काने के मक़सद से फायरिंग शुरू की।

फायरिंग की वजह से ही इलाके में दंगा भड़का। इत्तिला मिलने पर जब पुलिस वहां पहुंची, तब फायरिंग करनेवालों ने मजहबी नारा लगाया और पथराव शुरू किया। इसी वजह से दंगा और भड़क गया। समझाने पर पुलिस पर भी पथराव किया गया। पुलिस को तहक़ीक़ात के दौरान यह भी जानकारी मिली है कि फायरिंग करनेवाले नौजवान डोरंडा में किसी जमीन तनाजे के मसले को सुलझाने के लिए जुटे थे, हालांकि किस जमीन तनाजे को लेकर फायरिंग की वाकिया घटी थी और वाकिया के पीछे शामिल लोग कौन थे, पुलिस इसके बारे में सुबूत जमा कर रही है। हालांकि अब तक के तहक़ीक़ात में पुलिस को इस नुक्ते पर कोई सुबूत नहीं मिले हैं, जिससे वाजेह हो सके कि 28 सितंबर की रात की वाकिया 25 सितंबर की रात की वाकिया का ही सबब था। पुलिस 28 सितंबर की वाकिया के पीछे जमीन कारोबार से जुड़े मुजरिमों की मौलिसियत पर तहक़ीक़ात कर रही है।
कबीले ज़िक्र है कि 25 सितंबर की रात डोरंडा के एक मजहबी मुकाम के पास गाय का गोश्त मिलने को लेकर दो हिन्दू मुस्लिम में काशीदगी हुआ था। इस वाकिया के बाद कुछ लोगों ने 28 सितंबर की रात गौसनगर में फायरिंग की थी, जिससे माहौल बिगड़ गया था। वाकिया के बाद पुलिस ने दूसरे दिन मजिस्ट्रेट के बयान पर 47 के अलावा दीगर नामालूम के खिलाफ केस दर्ज कार्रवाई की। कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई। कार्रवाई के बाद माहौल धीरे-धीरे पुरअमन हुआ।

पुलिस को पहली नज़र जांच में जो जानकारी मिली है, उससे ऐसा लगता है कि वाकिया पहले से तय थी। वाकिया से मुतल्लिक़ दीगर नुक्तों पर पुलिस को जो जानकारी मिली है। उसमें गहराई से तहक़ीक़ात चल रही है।
प्रशांत आनंद, एएसपी हटिया

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