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‘पाकिस्तान को हर तरह की अमेरिकी सहायता रोक देने की सलाह’

वाशिंगटन: अमेरिकी कांग्रेस की एक समिति ने पाकिस्तान को दी जाने वाली हर तरह की सहायता पूरी तरह से खत्म करने की सलाह दी है।

‘आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान दोस्त या दूश्मन’ के विषय पर कांग्रेस की महत्वपूर्ण समझी जाने वाली विदेश मामलों की उप-समिति की सुनवाई के दौरान पाकिस्तान की नीतियों की कड़ी आलोचना हुई और अत्यंत कठोर शब्दों का प्रयोग किया गया।

उप-समिति के चीफ मैट सलमोन का कहना था कि उनकी निजी राय है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता पर पूरी तरह से पाबंदी लगा देनी चाहिए।

मंगलवार को उप-समिति के सवालों का जवाब देने के लिए पूर्व राजनयिक ज़लमे खलील ज़ाद, अमेरिकी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर टरसया बेकन और लॉन्गवार के जर्नल के वरिष्ठ संपादक विधेयक रजीव कांग्रेस में पेश हुए।ज़लमे खलील के पुत्र का कहना था कि अफगानिस्तान में जारी युद्ध की सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान की नीति है।

तीनों की राय थी कि पाकिस्तान अब भी ‘गुड और बैड तालिबान’ की नीति पर अग्रसर है और अमेरिका से किए गए वादों के बावजूद इन समूहों को निशाना नहीं बना रहा जो भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं या अमेरिकी सेना को निशाना बना रहे हैं। इन समूहों में विशेष रूप से हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अफगान तालिबान का उल्लेख किया गया।

इस सुनवाई से दो सप्ताह पहले विदेश मामलों की ही एक और उप-समिति के सरब्रा टेड पो ने एक अमेरिकी अखबार में कॉलम लिखकर पाकिस्तान की नीतियों की कड़ी आलोचना की थी।

इसके जवाब में अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत जलील अब्बास जिलानी ने उन्हें पत्र लिखकर कहा था कि पाकिस्तान ने पिछले दो वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में हक्कानी नेटवर्क समेत कई समूहों को निशाना बनाया है।

उनका कहना था, “इस कार्रवाई में 3,500 चरमपन्थी मारे गए जिनमें से 9,00 लश्करे इस्लाम के थे और वे अमेरिकी सेना की रसद और अन्य आपूर्ति पर हमला करते थे, इस कार्रवाई में 500 पाकिस्तानी सैनिक भी मारे गए। जलील अब्बास जिलानी ने कहा कि पाकिस्तानी खुद आतंकवादी सबसे बड़ा खतरा है और आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीयत पर शक नहीं करनी चाहिए।

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