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पाकिस्तान: माज़ूर कैदी को व्हीलचेयर पर दी जाएगी फांसी

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में एक ऐसे कैदी को फांसी दिए जाने पर गौर किया जा रहा है, जो खुद खड़ा भी नहीं हो सकता है. मुल्क में अपनी तरह के पहले मामले में कैदी को व्हीलचेयर पर बिठाकर ही फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा. 2009 में क़त्ल के मुल्ज़िम अब्दुल बासित (43) पिछले साल फैसलाबाद जेल में कैद के दौरान ही फालिज़ का शिकार हो गया था. बासित के जिस्म का कमर के नीचे का हिस्सा मफलूज़ होने की वजह से पूरी तरह ऐर् फआल यानी नाकारा है.

आपको मालूम कि गुजश्ता साल दिसंबर में पेशावर में हुए दहशतगर्दाना हमले के बाद से पाक में फांसी की सजा पर लगी रोक को हटा लिया गया था. फांसी की सजा पाए कैदियों की फहरिस्त में बासित का भी नाम शामिल है. लेकिन अब उसे फांसी दिए जाने के म‍सूबे को लेकर इंसानी हुकूक की तंज़ीमो ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.

यहां तक कि बासित को अगर फांसी दी जाती है तो यह पाकिस्तान के कानून के भी बरअक्स होगा, जिसके मुताबिक किसी भी कैदी को तभी फांसी दी जा सकती है, जब वह खुद अपने पैरों पर खड़ा होने में काबिल हो.

द टेलीग्राफ के मुताबिक 29 जुलाई को बासित को ‘ब्लैक वॉरंट’ दे दिया गया है. बासित के वकीलों औरइंसानी हुकूक की तंज़ीम उसकी फांसी रोके जाने के लिए मुहिम छेड़े हुए हैं. इस मामले में मंगल के रोज़ सुनवाई होनी है, अगर इसमें बासित को राहत नहीं मिलती है तो उसे जल्द ही फांसी दे दी जाएगी. यह फैसला जेल इंतेज़ामिया को ही करना है कि चलने-फिरने में लाचार बासित को आखिर किस तरह से फांसी दी जाएगी.

आपको बता दें कि 1993 में अमेरिका में 39 साल के कैदी चार्ल्स स्टांपर को फांसी दी गई थी, जो कमर के मुताल्लिक चोटों के सबब खड़ा नहीं हो सकता था.

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