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पानी को बचाना है तो करनी होगी एक – एक बूँद की रक्षा

26 जून को प्रधानमंत्री ने मन की बात में देश की जनता को संबोधित करते हुए कहा आज पानी है तो कल हैये संदेश देते हुए जल संरक्षण और भंडारण पर जोर दिया, उन्होंने आगे कहा कि जीवन बचाने जैसी चिंता जल को भी बचाने के लिए होनी चाहिए। क्योंकि जल जीवन का आधार है। भगवान का दिया हुआ प्रसाद , इसकी एक-एक बूंद को बचाने के लिए सभी लोगों को कोशिश करनी चाहिए। पूरे देश में पानी संरक्षित करने के लिए एक वातावरण बना है। पिछले दिनों सभी राज्यों में पानी जमा करने की दिशा में प्रयास हुए हैं, लेकिन अब जब पानी आया तो चला ना जाए यह देखना होगा 11 जुलाई को हिंदी अखबार दैनिक भास्कर में छपी एक खबर के अनुसार रेलवे प्लेटफार्म के शेड और कालोनियों में अब बारिश के बूँद – बूँद  की रक्षा की जाएगी, इसके लिए रेलवे प्लेटफार्म और कालोनियों में रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम बनाया जा रहा है। ताकि भूमिगत जल स्तर को बढ़ावा दिया जा सके, पीने के साफ और मीठे पानी की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने अपने सभी स्टेशनों और इससे सटे कालोनियों में इस प्रणाली को बनाने का निर्देश दिया है। रायगढ़ में प्लेटफॉर्म के शेड से गिरने वाले पानी को सुरक्षित करके हारवेस्टिंग द्वारा भूमिगत जल को रिचार्ज किया जाएगा। इसी तरह दक्षिण और उत्तर दोनों ओर की कालोनियों से बह कर बेवजह नालों में गिरने वाले पानी को एकत्रित करके 10×20 के हारवेस्टिंग टैंक में गिराया जाएगा, ताकि इस टैंक से छनकर पानी जमीन की तह तक चला जाए।

बिहार की राजधानी पटना से संबंध रखने वाली हिना गुलज़ारी जल के संरक्षण के संबंध में कहती हैं कि, भविष्य के लिए पानी का संरक्षण और इसका उचित उपयोग समय की मुख्य जरूरत है, इसलिए जब भी बारीश होती है मैं वर्षा जल को बाल्टी, और अन्य बड़े बर्तनों में जमा करती हूँ और फिर इसी पानी का उपयोग नहाने- धोने, घर और बर्तनकी सफाई आदि कामो में करती हूँ जम्मू-कश्मीर के जिला पूंछ के ब्लॉक सूरनकोट के निवासी और अंजुमन

ग्रामीण लेखक के अध्यक्ष श्री सिद्दीकी अहमद सिद्दीकी के अनुसार हमारे क्षेत्र में पानी की बहुत परेशानी है, लेकिन जागरूकता न होने की वजह से हम लोग बरसात के पानी का संरक्षण नहीं कर पाते, अगर हम पानी की रक्षा कर लें तो न केवल हम अपना भला करेंगें बल्कि दूसरों तक भी पानी पहुंचाया जा सकता है, इसके लिए हम आसानी से अपनी छतों से पाईपें लगाकर बारिश के पानी को एक टैंक में जमा कर लें और इसी पानी का इस्तेमाल माल मवेशी खाने पीने, कपड़े, बर्तन आदि को साफ रखने मे कर सकते हैं। वह आगे कहते हैं कि मैं एक शिक्षक होने के नाते भी अपने छात्रो को जल संरक्षण का अहसास दिलाकर जल संरक्षण का तरीका बताता हूँ। सार्वजनिक स्तर पर दूसरा तरीका यह हो सकता है कि गांव के लोग मिलकर तालाब बना लें और गांव के सारे पानी को इसी तालाब में एकत्र कर लें तो बरसात के बाद भी यह पानी उपयोगी रहेगा और महीनों तक हमारी आवश्यकताओं को पूरा करता रहेगा।

भारत-पाक में व्यापार के लिए प्रसिद्ध केंद्र चकन्दा बाग के पास खड़ी करमाड़ह की मस्जिद में इमामत करने वाले सैयद एजाज उल बुखारी के अनुसार पानी प्रकृति का एक अनमोल उपहार है इसलिए उसकी सुरक्षा हम सभी के लिए जरूरी है, हम लोग अपने घरों की छतों से होकर आने वाले पानी को ड्रामो और बड़े बर्तन में सहेजकर रख लेते हैं और इसका प्रयोग माल मवेशी के अलावा शौच आदि के लिए भी इस्तेमाल करते हैं, कुछ विशेष अवसरों पर तो हमारे पूर्वजों ने इसी बरसाती पानी का उपयोग करने की प्रेरणा भी दी है वह एक घटना की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि  एक बुजुर्ग ने एक लाइलाज रोगी के लिए यह प्रस्ताव किया कि बरसात के पानी पर खत्म शरीफ दम करके उसे पिलाया जाए तो अल्लाह पाक उसे स्वस्थ करेगा |एंटीग्रटेड वॉटर मैनेजमेंट प्रोग्राम जिला पूंछ के तकनीक विशेषज्ञ श्री कफील अहमद भट्टी इस संबंध में कहते हैं कि हम हारवेस्टिंग टैंक बनाने के लिए न केवल जनता को जागरूक करते हैं बल्कि हम उन्हें वित्तीय सहायता भी प्रदान करते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस प्रणाली को अपनाकर पानी की रक्षा कर सकें, इसी के तहत हम तालाब भी इस ढंग से बनाते हैं कि उसकी चहारदीवारी को पूरी तरह पुख्ता कर देते हैं ताकि पानी बर्बाद न हो ।जबकि निचली सतह को पक्का नहीं करते ताकि पानी जमीन में अवशोषित हो और पानी का जखीरा बन सके, उसका उद्देश्य यह होता है कि माल मवेशी की जरूरतें पूरी हो सकें, इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति सब्जियां या फसलें पैदा करना चाहे तो आसानी से इससे लाभान्वित हो सकता है, क्योंकि जब हम किसी जगह पानी इकट्ठा करते हैं तो उसके पास पड़ोस की चार छह कनाल भूमि में नमी होती है अगर समय पर पानी उपलब्ध नहीं हो, तब भी यह नमी फसल के लिए फायदेमंद साबित होती है।

अंजुमन ग्रामीण देही कलमकार, मंडी के अध्यक्ष और स्थानीय अखबार के पत्रकार रियाज मल्लिक एक प्रशन के उत्र में कहते हैं कि सरकार और खासकर विभाग पी एच ई तो अब काम करने लगा है, लेकिन हम निवासीयों की भी कुछ जिम्मेदारी होती है कि इसके साथ सहयोग करें, ताकि बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सके, लेकिन हमारा हाल यह है कि अगर कहीं पानी की पाइप टूट गई तो हम इंतजार में रहते हैं कि पीएच ई के कर्मचारी ही आकर ठीक करे, और यदि दो चार दिन तक नही आते तो वह पाइप कुछ दिनों के बाद हमारी निजी संपत्ति बन जाती है और फिर हम लोग सड़क जाम करने का विकल्प ढुंढ़ लेते हैं, हालांकि हम खुद भी पाईप को सही कर सकते हैं वह बरसात के पानी के संरक्षण के बारे में कहते हैं कि अगर हम लोग बरसात के दिनों में अपनी अपनी छतों के पानी को सुरक्षित रख लें तो कई कार्यों में इस पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है, उदाहरण के लिए किचन गार्डन में लगी सब्जियों और दरवाजे की शोभा बढ़ाने वाले फूल पौधों के अलावा पालतू जानवरो की भी प्यास बुझाई जा सकती है। हमारे कश्मीर में पानी की कमी कतई नहीं है, कश्मीर को झरने, चश्मे, नदी, नाले और बर्फ की सफेद चादरो ने अपनी गोद में लेकर कशमीर को स्वर्ग बना दिया है।

जम्मू-कश्मीर के पड़ोस में बसने वाली पहाड़ी राज्य हिमाचल परदेश के जिला कांगड़ा से संबंधित श्री संजय मिश्रा कहते हैं कि हमारे यहां रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम पिछले सात आठ साल से शुरू हुआ, इसके तीन तरीके हैं पहला: .बहते हुए नालों में दो तीन किलोमीटर की दूरी पर बांध बनाकर पानी को अधिक से अधिक भूमि में अवशोषित होने दिया जाता है। दूसरा- पहाड़ों की चोटियों से रिसने वाले पानी को जमीनी स्तर पर लाने के लिए पतली नालीयाँ बनाई जाती है ताकि पानी बर्बाद होने केबजाय आसानी से मैदानी इलाकों में जमीन के अंदर अवशोषित हो जाए।तीसरा तरीका यह है कि 20×20 या 12×12 का भूमिगत टैंक बनाया जाता है जिसमें बरसाती पानी का भंडार इक्ट्ठा कर लिया जाता है, जो

गर्मियों के समय में सिंचाई और पालतू जानवरों के काम आता है कभी कभी यह पानी गंदा हो जाता है तो इसमें दवा डालकर इसे फिर से प्रयोग करने योग्य बना लिया जाता है। वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था WHO के मुताबिक एक दिन में एक व्यक्ति पर पानी का खर्च 120 लीटर है, यानी पांच लोगों के एक परिवार के लिए एक अनुमान के अनुसार अधिक से अधिक एक हजार लीटर पानी की जरूरत पड़ती है । अगर हम पंद्रह सौ वर्ग फुट की छत का उपयोग कर वर्षा जल के लिए हारवीसटिंग प्रणाली अपनाते हैं तो लगभग 1.70 लाख लीटर पानी जमा होगा, जो किसी भी पांच लोगों वाले परिवार के लिए आसानी से छह महीने के लिए पर्याप्त होगा। आज जब प्रकृति अपने मीठे और शफ़ाबखश पानी हमें उपलब्ध करा रही है तो जरूरत इस बात की है कि इस अमूल्य बूंद को पूरी तरह सुरक्षित रखने की कोशिश की जाए। क्योंकि हम सभी के मन में है पानी की बात |

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मौ0 अनिस उर रहमान खान

(लेखक चरखा फ़ीचर्स डेवलपमेंट कम्यूनिकेशन नेटवर्क के डिप्टी  एडिटर  हैं)
उपरोक्त आलेख नेशनल फांउडेशन फॉर इंडिया(एन-एफ-आई) के द्वारा दिए गए फेलोशिप के अंतर्गत लिखा गया है।

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