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‘पापा ठीक हैं, टेंशन मत लो’: राबड़ी देवी

साबिक वज़ीर ए आला राबड़ी देवी अपनी बेटियों को समझा रही हैं कि, 'पापा [लालू प्रसाद] ठीक हैं। टेंशन मत लो।' हालांकि, जेल जाने के बाद लालू प्रसाद से उनकी बातचीत नहीं हुई है। रांची में मौजूद दूसरे लीडरों से ही वह हालचाल ले रही हैं। फिर सबको ब

साबिक वज़ीर ए आला राबड़ी देवी अपनी बेटियों को समझा रही हैं कि, ‘पापा [लालू प्रसाद] ठीक हैं। टेंशन मत लो।’ हालांकि, जेल जाने के बाद लालू प्रसाद से उनकी बातचीत नहीं हुई है। रांची में मौजूद दूसरे लीडरों से ही वह हालचाल ले रही हैं। फिर सबको बताती हैं। रिश्तेदार उनसे फोन पर हाल पूछ रहे हैं। वह सबको फिक्र न करने की सलाह दे रही हैं। राबड़ी देवी की एक बेटी रोहिणी बैरून/ विदेश में है। वह बार-बार वालिद के बारे में पूछती है-‘खाना कैसे खा रहे हैं? वक्त पर दवा ले रहे कि नहीं? तबीयत ठीक रहती है न?’ राबड़ी बगैर घबराये हुए बच्चों को कहती हैं कि ‘पापा ठीक हैं। खुद वक्त पर खाना खाओ। पापा व हमलोगों की फिक्र मत करो। अपना ख्याल रखो। हमलोग तो पहले से मानकर चल रहे थे कि यही होने वाला है। इसके लिए ही हाई कोर्ट गए थे। घबराने की जरूरत नहीं है। हाई कोर्ट में जाएंगे। जनता हमारे साथ है।

लालू की सात बेटियों में सबसे छोटी बेटी राजलक्ष्मी मां [राबड़ी देवी] के साथ हैं। राबड़ी कहती हैं-‘मेरे पास चारों तरफ से फोन आ रहा है। यही कहा जा रहा है कि राजद की ताकत बढ़ेगी। हमलोग अकेले नहीं हैं। करोड़ों लोग साथ हैं। मैं गांवों का भी दौरा करूंगी ।

लालू के जेल जाने से मजरूह साबिक वज़ीर ए आला राबड़ी देवी ने मंगल के दिन सीबीआइ पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 22 नवंबर को जनता सीबीआइ की गैर जानिबदारी को देखेगी। इस दिन कोर्ट में सीबीआइ को चारा घोटाले के ही मामले में वज़ीर ए आला नीतीश कुमार पर हलफनामा दायर करना है। राबड़ी ने कहा कि खानदान तो सभी पार्टियों में है। बावजूद इसके उनका बेटा पार्टी में किसी ओहदे पर नहीं है।

राबड़ी ने कहा कि चारा घोटाला तो 1977 से ही हुआ है, जबकि जांच सिर्फ लालू प्रसाद के इक्तेदार से हुआ। लालू पर लगाए गए इल्ज़ामात में कोई सुबूत नहीं है। इस दौरान राबड़ी वज़ीर ए आला नीतीश कुमार पर जमकर बरसीं। उन्होंने कहा कि लालू को जिस केस में गुनाहगार ठहराया गया उसी मामले में नीतीश कुमार, शिवांनद तिवारी व ललन सिंह पर भी इल्ज़ाम थे। लेकिन सीबीआइ ने उन लोगों का नाम हटा दिया। अब देखना है कि हलफनामे में सीबीआइ कितनी गैर जानिबदारी दिखाती है।

———-बशुक्रिया: जागरण

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