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पायलेट्स की जानिब से किंगफिशर एयरलाईन्स को ताज़ा मसाइल दरपेश

किंगफिशर एयरलाईन्स को इम्कान है कि मुंबई से परवाज़ करने वाले अपने तय्यारों का मुक़र्ररा प्रोग्राम बरक़रार रखने के सिलसिले में सख़्त आज़माईश का सामना करना पड़े क्योंकि पायलेट ने कल से उनकी वाजिब अलादा तनख़्वाहों और एलाउनसेस की अदमे अ

किंगफिशर एयरलाईन्स को इम्कान है कि मुंबई से परवाज़ करने वाले अपने तय्यारों का मुक़र्ररा प्रोग्राम बरक़रार रखने के सिलसिले में सख़्त आज़माईश का सामना करना पड़े क्योंकि पायलेट ने कल से उनकी वाजिब अलादा तनख़्वाहों और एलाउनसेस की अदमे अदाइगी की सूरत में तय्यारे परवाज़ करने से इनकार कर दिया है और एयरलाईन्स को अल्टीमेटम दिया है कि अंदरून 48 घंटे उन के बकाए जात अदा कर दिए जाएं अगर पायलेट्स की अक्सरीयत अपने मुतालिबा पर तवील मुद्दत तक अटल रही तो अंदेशा है कि एयरलाईन्स को अक़ल्ल तरीन तादाद में भी तय्यारों की परवाज़ के प्रोग्राम पर अमल करना मुश्किल हो जाएगा।

कल से अंदेशा है कि 80 फ़ीसद पायलेटस डयूटी पर हाज़िर नहीं होंगे। किंगफिशर एयरलाईन्स के सदर नशीन विजय माल्या और दीगर आला सतही ओहदेदारों को 6 मार्च को ही इस सिलसिले में नोटिस दी जा चुकी है। किंगफिशर के 500 मुलाज़मीन पायलेटस हैं और चूँकि उनकी कोई यूनीयन नहीं है इसलिए ये मसला इनका इन्फ़िरादी फ़ैसला होगा।

इस फ़ैसले पर अमल आवरी की सूरत में एयरलाईन्स अपनी परवाज़ों के प्रोग्राम को बरक़रार नहीं रख सकेगा। मुंबई से हांगकांग रोज़ाना परवाज़ें भी मंसूख़ होने का ख़तरा है। एयरलाईन्स का नेटवर्क दिन ब दिन सिकुड़ता जा रहा है और उसे हर वक़्त पायलेट्स की ज़रूरत दरपेश रहती है।

एयरलाईन्स के मौजूदा मआशी बोहरान के पेशे नज़र उसको नए पायलेट्स दस्तयाब होने का इम्कान नहीं है।

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