Tuesday , October 17 2017
Home / India / पार्टी 2014में वज़ीर-ए-आज़म के इंतेख़ाब के मौक़िफ़ में होना चाहीए : जया ललीता

पार्टी 2014में वज़ीर-ए-आज़म के इंतेख़ाब के मौक़िफ़ में होना चाहीए : जया ललीता

ए आई ए डी एम के सरबराह और तामिलनाडू की वज़ीर-ए-आला जया ललीता अब क़ौमी सियासत में भी अहम रोल अदा करने की ख़ाहां हैं और अपने पार्टी क़ाइदीन-ओ-अरकान से एक ऐसी ख़ाहिश की है जिस के बारे में यही कहा जा सकता है कि वो अब मज़ीद बुलंद परवाज़ करना चाहती

ए आई ए डी एम के सरबराह और तामिलनाडू की वज़ीर-ए-आला जया ललीता अब क़ौमी सियासत में भी अहम रोल अदा करने की ख़ाहां हैं और अपने पार्टी क़ाइदीन-ओ-अरकान से एक ऐसी ख़ाहिश की है जिस के बारे में यही कहा जा सकता है कि वो अब मज़ीद बुलंद परवाज़ करना चाहती हैं।

उन्होंने कहा कि 2014 के इंतेख़ाबात में लोक सभा की तमाम 40 नशिस्तें उन्हें तहफ़तन दी जाय। 24 फ़रवरी को अपनी 64 वीं सालगिरा मनाने वाली जया ललीता से कहा कि मेरे अज़ीज़ साथियो, 2014 के इंतेख़ाबात में सब से बेहतरीन तोहफ़ा वो होगा जब तमाम 40 नशिस्तों पर कामयाबी हासिल की जाएगी, जिस की तैयारी हमें अभी से शुरू करना है।

याद रहे कि तामिलनाडू में लोक सभा की 39 नशिस्तें हैं और पड़ोसी मर्कज़ के ज़ेर-ए-इंतज़ाम रियासत पडुचेरी में सिर्फ एक नशिस्त है। यहां इस बात का तज़किरा बजा ना होगा कि इस नौईयत की ख़ाहिश पहली बार मंज़र-ए-आम पर नहीं आई है बल्कि जया ललीता क़ब्लअज़ीं भी क़ौमी सियासत का हिस्सा बनने की ख़ाहिश का इज़हार कर चुकी है।

गुज़श्ता साल दिसम्बर में पार्टी के जनरल कौंसल इजलास में ख़िताब करते हुए उन्हों ने पार्टी वर्कर्स से कहा था कि उन्हें अब क़ौमी सियासत में भी अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाना चाहीए जिस के बाद पार्टी का मौक़िफ़ इतना मुस्तहकम हो जाएगा कि पार्टी वज़ीर-ए-आज़म के इंतेख़ाब में भी कलीदी रोल अदा कर सकेगी। 2009 के लोक सभा इंतेख़ाबात में ए आई डी एम के को सिर्फ 9 नशिस्तों पर कामयाबी मिली थी लेकिन गुज़शता साल 13 अप्रैल को मुनाक़िदा इंतेख़ाबात में पार्टी ने वो कामयाबी हासिल की, जिस से रिवायती हरीफ़ डी ऐम के को हज़ीमत उठानी पड़ी और जया ललीता तीसरी बार तामिलनाडू के वज़ीर-ए-आला के ओहदा पर फ़ाइज़ हो गईं।

अपनी सालगिरा से क़बल पार्टी वर्कर्स को अपना पैग़ाम देते हुए कहा कि सालगिरा पर कोई धूम धाम करने की ज़रूरत नहीं है। ये काम तो डी एम के वर्कर्स किया करते थे, लेकिन अवाम ऐसी धूम धाम से ख़ुश या मरऊब नहीं होते।

TOPPOPULARRECENT