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पार्लीमेंट में लोक पाल बिल पेश , मुस्लमानों को तहफ़्फुज़ात

नई दिल्ली २३ दिसम्बर: (पी टी आई) हुकूमत ने आज पार्लीमैंट में लोक पाल बिल पेश कर दिया है और लोक पाल में मुस्लमानों के लिए तहफ़्फुज़ात का ज़मुरा में शामिल कर लिया। इन तहफ़्फुज़ात के तहत लोक पाल के अरकान में 50फ़ीसद अरकान एस सी एस टी और दीगर अफ

नई दिल्ली २३ दिसम्बर: (पी टी आई) हुकूमत ने आज पार्लीमैंट में लोक पाल बिल पेश कर दिया है और लोक पाल में मुस्लमानों के लिए तहफ़्फुज़ात का ज़मुरा में शामिल कर लिया। इन तहफ़्फुज़ात के तहत लोक पाल के अरकान में 50फ़ीसद अरकान एस सी एस टी और दीगर अफ़राद के इलावा अक़ल्लीयतों और ख़वातीन शामिल होंगी।

इंसिदाद रिश्वत सतानी के मुजव्वज़ा क़ानून के मुख़्तलिफ़ दफ़आत पर कई अरकान-ए-पार्लीमैंट ने एहतिजाज किया। हुकूमत ने लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव और दीगर अरकान के एहतिजाज के बाद मुस्लमानों के कोटा को दुबारा शामिल करने का फ़ैसला किया। लोक पाल बिल में मुस्लमानों के लिए तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने पर बी जे पी ने एहतिजाज किया।

अरकान-ए-पार्लीमैंट का कहना था कि इंसिदाद रिश्वत सतानी क़ानून के मुजव्वज़ा दफ़आत नाक़ाबिल-ए-क़बूल हैं। पार्लीमैंट एक सुप्रीम अथॉरीटी है,इस को किसी के ब्लैक मेल के सामने घुटने नहीं टेकना चाहिये। बी जे पी ने दावा किया कि मज़हब की असास पर तहफ़्फुज़ात ग़ैर दस्तूरी हैं। राष्ट्रीय जनतादल के सदर लालू प्रसाद ने अना हज़ारे और उन की टीम के अरकान पर तंज़ किया। कांग्रेस ज़ेर-ए-क़ियादत यू पी ए हुकूमत पर भी इल्ज़ाम आइद किया कि वो उजलत में बिल पेश करने की कोशिश कर रही है।

इन की इस बात की कई दीगर अरकान-ए-पार्लीमैंट ने भी हिमायत की। जिन में समाजवादी पार्टी के सदर मुलाइम सिंह यादव, जनतादल (यू) के एम पी शरद यादव और शिवसेना के अनंत गेटे भी शामिल हैं। पार्लीमैंट की कार्रवाई में कई मर्तबा ख़लल अंदाज़ी और अलतवा के बाद लोक पाल बल को मुमलिकती वज़ीर-ए-पार्लीमानी उमोर वे नारायना स्वामी ने शोर-ओ-गुल के दरमयान पेश कर दिया।

नारायना स्वामी ने ये बिल साबिक़ मुसव्वदा को वापस लेने के बाद मुतआरिफ़ कराया है। वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने कहाकि उन्हें तवक़्क़ो है कि ये बिल पार्लीमेंट में मंज़ूर होगा। लोक सभा में लोक पाल बिल की पेशकशी के फ़ौरी बाद अपोज़ीशन लीडर और भारतीय जनता पार्टी की रुकन पार्लीमैंट सुषमा स्वराज ने इंसिदाद रिश्वत सतानी क़ानून में मुस्लमानों को तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने के लिए मुंदरज दफ़आत पर एतराज़ किया।

सुषमा स्वराज ने कहाकि में इस बल पर बाअज़ एतराज़ात उठाने जा रही हूँ। इस बिल ने हमें मायूस किया है। अगर इस बिल को अदालत में चैलेंज किया गया तो पहले ही दिन उसे मुस्तर्द करदिया जाएगा क्यों कि तहफ़्फुज़ात की पालिसी का कोई मेरिट नहीं है। मज़हब की असास पर तहफ़्फुज़ात को दस्तूरी तौर पर इजाज़त हासिल नहीं है।

उन्हों ने ये भी मुतालिबा किया कि मौजूदा बिल को फ़ौरी वापस लिया जाना चाहिये। ये ज़रूरी है कि हमें एक क़ानून बनाना है लेकिन एक ऐसा क़ानून नहीं जो क़तई ग़ैर दस्तूरी हो और उसे बादअज़ां क़ानून की अदालत में मुस्तर्द कर दिया जाये। अपोज़ीशन लीडर ने ये भी कहाकि रियास्तें लोक आयुक़्त् को इख़तियारी नहीं बनायेंगे लेकिन ये दस्तूर के दायरा के तहत इख़तियारी इदारा है।

बी जे पी ने मौजूदा शक्ल में लोक पाल और लोक आयुक्त बल की पेश कशी की मुख़ालिफ़त की और इस पर नज़रसानी के लिए ज़ोर दिया। ताहम वज़ीर फ़ीनानस और क़ाइद ऐवान परनब मुकर्जी ने सुषमा स्वराज के इल्ज़ामात का जवाब देते हुए निशानदेही की कि पार्लीमैंट को बल मंज़ूर करने और क़ानूनसाज़ी का हक़ हासिल है। ये सिर्फ एक क़ानून का पुर्ज़ा नहीं है।

बिल के लिए मुल्क भर में एहतिजाज हो रहा है। बिल लाने के लिए एक कमेटी ने भी अपना काम मुकम्मल किया है। अगर बिल को अदालतों की जानिब से रोक दिया गया तो इस का मतलब ये नहीं कि पार्लीमैंट बल को मंज़ूर ही ना करें। ये अदालतों का काम है कि बल की दस्तूरी नौईयत का फ़ैसला करें। हमारा काम उसे बनाना और बिल को मंज़ूर करना है और अदालतों को इस का काम करने दी जाये। हम अपना काम करेंगे।

समाजवादी पार्टी सदर मुलायम सिंह यादव ने कहा कि इस बिल में वज़ीर-ए-आज़म को लोक पाल के तहत लाया गया है जो दस्तूरी दफ़आत के मुग़ाइर है। क़ब्लअज़ीं हुकूमत ने नए लोक पाल बल से अक़ल्लीयतों के लिए लोक पाल बंच में 50 फ़ीसद कोटा से मुताल्लिक़ एक शक़ को हज़फ़ कर दिया था।

नज़रसानी शूदा 64 सफ़हात के लोक पाल और लोक आयुक्त बिल 2011 में लोक पाल और लोक आयुक्त के 50 फ़ीसद अरकान को एस सी, एस टी , ओ बी सी और ख़वातीन के लिए मुख़तस करने की तजवीज़ रखी गई थी लेकिन इस में से अक़ल्लीयतों का ज़िक्र हटा दिया गया था। लेकिन हुकूमत ने आर जे डी सदर लालू प्रसाद यादव और दीगर पार्टीयों के एहतिजाज के बाद लोक पाल बिल में अक़ल्लीयतों के तहफ़्फुज़ात के लिए दफ़आत को बाद में शामिल कर लिया।

इसी दौरान अना हज़ारे ने हुकूमत के साथ अपने तसादुम का महाज़ खोलते हुए लोक पाल बल को मुस्तर्द कर दिया और कहा कि ये बहुत ही कमज़ोर ही। उन्हों ने सोनीया गांधी को चैलेंज किया कि वो मुजव्वज़ा क़ानून पर अवामी बहस के लिए तैय्यार रहें। बी जे पी, शिवसेना, आर जे डी, अना डी ऐम के और दीगर मुख़्तलिफ़ पार्टीयों ने बल की मौजूदा शक्ल में पेशकशी की मुख़ालिफ़त की और हुकूमत पर नज़रसानी के लिए ज़ोर दिया। आर जे डी,समाजवादी पार्टी, अना डी ऐम के और दीगर ने लोक पाल के तहत वज़ीर-ए-आज़म को लाने की मुख़ालिफ़त की और कहाकि ये इदारा किसी के लिए भी जवाबदेह नहीं है।

बी जे पी, जनतादल (यू), बी जे डी, अना डी ऐम की, डी ऐम के और सी पी आई (ऐम) ने लोक पाल बल के दफ़आत पर एतराज़ किया और इद्दिआ किया कि इस बल को रूबा अमल लाने के लिए रियास्तों को इख़तियारी बनाया जाय ताकि वो लोक आयुक्त क़ायम कर सकें।

ये बिल वफ़ाक़ी ढांचा पर हमला के मुतरादिफ़ है। कई अरकान ने भी बल की मुख़ालिफ़त की। परनब मुकर्जी ने कहाकि ऐवान की ये दस्तूरी ज़िम्मेदारी है कि वो क़ानून को मंज़ूर करें। इस बल की मंज़ूरी का इन्हिसार अरकान की ताईद पर है। अन्ना हज़ारे ने कहा कि सोनीया गांधी ने बल को मज़बूत बताया था अगर ये सही है तो वो मीडीया के सामने आकर इस पर बेहस करें।

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