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पिछले 9 सालों से खुद को जिंदा साबित करने की लड़ाई लड़ने वाला संतोष पहुंचा नामांकन करने

वाराणसी: सरकारी कागजों में मृत घोषित संतोष मूरत सिंह पिछले 9 सालों से खुद को जिंदा साबित करने की लड़ाई लड़ रहे मूरत सिंह ने वाराणसी के शिवपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का फैसला करते हुए बुधवार को नामांकन दाखिल किया. क्षेत्र के विकास या किसी दूसरे मुद्दे के लिए नहीं बल्कि संतोष अपने गले में ‘जिंदा हूं मैं’ की तख्ती लटकाए खुद को जिंदा साबित करने के लिए नामांकन दाखिल किया है.

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वन इंडिया के अनुसार, अपने गले में ‘जिंदा हूं मैं’ की तख्ती लटकाए संतोष नाम का ये शख्स अपने ज़िंदा होने की सबूत रहने के सबूत पाने के लिए अब चुनाव लड़ने जा रहा है और यही कारण है कि इसने नामांकन दाखिल किया है.
संतोष चौबेपुर के छितौनी गाँव का रहने वाला है उसके माता-पिता बचपन में मर चुके हैं. वह मुंबई में रहता था. संतोष को मुंबई बम ब्लास्ट में मरा हुआ दिखाकर यहां गांव में तेरहवीं भी कर दी और उस के अपनों ने ही उस की 22 बीघा जमीन पर अपना नाम दर्ज कर लिया. संतोष का कहना है कि दलित लड़की से कोर्ट में शादी करने के बाद मेरे पड़ोसियों ने जमीन कब्ज़ा कर लिया.
संतोष के वकील दीपक मिश्रा कहते हैं कि संतोष को अभिलेखों में मृत साबित करते हुए उसके विरोधियों ने मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनवा लिया है. संतोष इसके पहले भी चुनाव में नामांकन किया था लेकिन वो फेल हो गया था अब एक बार फिर नामांकन किया है अगर इस बार उनका नामांकन वैध साबित होता है तो इनके जिंदा होने का प्रमाण शासन को देना पड़ेगा.

उल्लेखनीय है कि संतोष इसके पहले दिल्ली जंतर मंतर पे धरना दे चुका है और मुख्यमंत्री से भी अपनी शिकायत कर चुका है. जिसके बाद सूबे की राजधानी में मुकदमा दर्ज भी हुआ लेकिन पिछले नौ साल से लड़ाई लड़ने वाले संतोष को अभी तक जिंदा होने का प्रमाण नहीं मिल पाया है.

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