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पीएम मोदी का शमशान वाला बयान लोगों को बाँटने वाला ही नहीं, झूठा और खोखला भी है

फ़तेहपुर में दिए हुए पीएम मोदी के भाषण की चर्चा सोशल मीडिया पर ख़ूब हो रही है। यूँ तो उम्मीद के उलट लग रहा था कि यूपी में भाजपा अपने तरकश से साम्प्रदायिक तीर निकालने के बजाय विकास के नाम पर चुनाव लड़ेगी। लेकिन पार्टी ने उम्मीद और पुरानी रणनीति पर चलते हुए धार्मिक कार्ड सामने कर दिया है।

पीएम मोदी के इस भाषण को इसी रणनीति की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल बीते कल उन्होंने सूबे की अखिलेश सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा था कि सरकार ने कब्रिस्तान बनाया तो श्मशान का भी ध्यान रखना चाहिए।

हालाँकि सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने पीएम की बाँटने वाली राजनीति को भाप लिया है। लगातार प्रतिक्रियाएँ आ रहीं हैं। और ऐसे बयान के लिए मोदी की फ़ज़ीहत भी ख़ूब हो रही है। बहरहाल, वोटों के ध्रुवीकरण से इतर भाषण के दौरान सरकार पर लगाए गए आरोप की भी बात की जाए, तो साफ़ पता चलता है कि पीएम का भाषण महज़ एक रणनीति का ही हिस्सा था। क्योंकि उनकी कही गईं बातें एकदम ग़लत और कोरा झूठ है। क्योंकि इस बात से बिलकुल भी इंकार नहीं किया जा सकता कि अखिलेश सरकार ने जहाँ क़ब्रिस्तान का ख़याल रखा वहीं श्मशान का भी ध्यान दिया।

साल 2016-17 के बजट में सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने ग्रामीण इलाकों के श्मशान घाटों के विकास के लिए 127 करोड़ रूपये का बजट पास किया था। शहरी विकास मंत्रलाय ने भी शहर के श्मशानों के लिए 100 करोड़ रूपये का बजट आवंटित किया था। वहीं इस बार अल्पसंख्यकों के क़ब्रिस्तान अन्त्येष्टि स्थलों के बाउंड्री वाल के लिए सरकार के अल्पसंख्यक विभाग ने 400 करोड़ का बजट रखा है।

आपको बता दें कि 2015-16 वर्ष के बजट में भी अखिलेश सरकार ने जहाँ एक तरफ कब्रिस्तान के लिए 200 करोड़ का बजट दिए, वहीं दूसरी तरफ राज्य के ग्रामीण विकास विभाग ने ग्रामीण इलाकों में श्मशान घाट के विकास के लिए 100 करोड़ का बजट दिया था। साथ ही शहरी विकास मंत्रालय ने भी शहर के श्मशान घाटों के विकास के लिए 100 करोड़ रूपये का बजट रखा था।

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