Wednesday , August 23 2017
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पीएम मोदी पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दो हिस्सों में बंटे तलबा और प्रोफेसर।

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अब्दुल हमीद अंसारी। siasat hindi

वजिर ए आज़म नरेंद्र मोदी से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के वीसी रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह की हाल में हुई मुलाकात ने कैंपस में कयासों को और हवा दे दी है। इस मुलाकात के बाद कैंपस में स्टूडेंट और प्रफेसर के बीच इस सवाल पर 2 खेमे बनते जा रहे हैं कि क्या PM को यहां आने का दावत दिया जाना चाहिए?

हाल ही में पीएम मोदी को दिल्ली की जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के प्रोग्राम में दावत करने को लेकर काफी बवाल हुआ था। मुखालफत करने वाले तलबा का यह कहना था कि यूनिवर्सिटी को ऐसे आदमी को चीफ गेस्ट के तौर पर नहीं बुलाना चाहिए, जिसने 2008 के बटला हाउस एनकाउंटर केस में गिरफ्तार जामिया के 2 तलबा को यूनिवर्सिटी की तरफ से कानूनी मदद देने के फैसले को गलत बताया था।अब एएमयू में इस बात को लेकर 2 खेमे बन गए हैं कि क्या पीएम को कैंपस में दावत करना चाहिए?

हालांकि, वीसी शाह ने इस मुद्दे पर टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि वह कुछ भी ऐसा नहीं करेंगे, जो यूनिवर्सिटी को खेमों में बांट दे। उन्होंने कहा, ‘मैं एक सरकारी मुसलमान के तौर पर भी नहीं जाना जाना चाहता, ऐसा मुसलमान जो निजी फायदे के लिए सत्ता में मौजूद लोगों के साथ खड़ा हो जाए।’ यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी मुलाकात के बाद अब पीएम कैंपस का दौरा करेंगे, उन्होंने कहा ‘मैं इसपर विचार कर रहा हूं और सिर्फ यूनिवर्सिटी के हक में ही कोई फैसला लूंगा। हम इस सच्चाई को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि सर सैयद अहमद खान भी भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड लिटन से मिले थे और यूनिवर्सिटी के लिए फंड लेकर आए थे। हालांकि, साथ ही मैं यह भी कह दूं कि कुछ भी ऐसा नहीं किया जाएगा जिससे कैंपस बंट जाए। हम तालीम के लिए मिल कर काम करते हैं।’

इस बारे में पूछे जाने पर हिस्ट्री डिपार्टमेंट के असोसिएट प्रफेसर नदीम रिजवी ने कहा कि यहां बात सिर्फ बीजेपी या नरेंद्र मोदी की नहीं है। उन्होंने कहा कि एएमयू में पीएम को दावत करने का इतिहास नहीं रहा है। यहां तक की इंदिरा गांधी को भी कभी यहां आने नहीं दिया गया।
पीएम को दावत करने का समर्थन कर रहे तालबाओ के भी अपने तर्क हैं। लॉ फैकल्टी के एक छात्र मो. जोरैज ने कहा, ‘मोदी the के प्रधानमंत्री हैं। वह हिंदू और मुस्लिम, दोनों के वज़ीर ए आज़म हैं। उनके आने से हमारी फंड की चिंता दूर हो सकती है।’

शाह ने पिछले हफ्ते ही एक टीम के साथ संसद भवन में वज़ीर ए आजम नरेंद्र मोदी से मिले थे। इस मुलाकात में उन्होंने जनाब मोदी से गुजारिश किया था कि वह एएमयू को दूसरे सेंट्रल यूनिवर्सिटी की तरह फंड मुहैया कराने में मदद करें। उन्होंने एएमयू के मल्लापुरम (केरल), मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल) और किशनगंज (बिहार) में मौजूद तीनों सेंटरों पर चल रहे कंस्ट्रशन के काम को जारी रखने के लिये माली मदद की जरूरत के बारे में पीएम को बताया था। उन्होंने ने पीएम को एएमयू की खूबियों के बारे में बताया और कहा कि एएमयू के साइंसदां क्लीन गंगा एवं यमुना प्रॉजेक्ट में अहम किरदार अदा कर रहे है।

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