Wednesday , August 23 2017
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पीडीपी-भाजपा सरकार कश्मीर की अशांति के जिम्मेदार

नई दिल्ली: वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने आज पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार को कश्मीर घाटी में अशांति का जिम्मेदार ठहराया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान ” संकट में शिद्दत पैदा करने ” की वजह बन गया है।

चिदंबरम ने कहा कि उन्हें जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर चिंता है जो पूरी अराजकता के आलम की ओर तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पीडी पी.बी जेपी मिश्रित राज्य सरकार स्थिति में पिछले छह हफ्तों में काफी गिरावट पैदा की पूरी तरह से जिम्मेदार है। यूपीए कार्यकाल में गृह मंत्री और वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने संकट में शिद्दत पैदा करदी है।

शब्दों में मध्यम और कृत्यों में नरमी की स्थिति में सुधार पैदा कर सकते हैं। मानव जानें ज़ाया हो रही हैं। उनमें विरोध करने वाले युवा निर्दोष नागरिक और सैनिक शामिल हैं। इससे हम सभी को परेशानी पैदा हो गई है यह सब बंद कर देना चाहिए। चिदंबरम ने कहा कि जिस अंदाज में संकट बेकाबू हो रहा है उन्हें डर है कि मौजूदा सरकार नहीं रोक सकेगी क्योंकि यह मुख्य कारण खुद मौजूदा सरकार है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस अगर लुभाने हूँ तो पीडीपी उनके साथ गठबंधन करके समस्या का समाधान कर सकती है। पहले हिंसा रोका जाना चाहिए के बाद उम्मीद पैदा होगी। शांति और समृद्धि आएगी। जम्मू-कश्मीर की जनता कश्मीर घाटी में जीवन दिनचर्या लाएंगे। वर्तमान में अनुकूलन मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान‌ वाणी की सेना के साथ मुठभेड़ में 8 जुलाई को मौत के बाद विरोध प्रदर्शनों के दौरान अभी 63 लोग मारे गए हैं और अन्य हजारों घायल हैं।

पिछले महीने चिदंबरम ने कहा था कि कश्मीर की स्थिति गलत तरीके से पेश किया गया है। कश्मीर और दिल्ली में स्थापित होने वाले सरकारों ने एक के बाद दीगररे इस समस्या से गलत तरीके से पेश किया है। हम (यूपीए सरकार) ने बेशक गलती की थी लेकिन 2010 में हम से स्वयं सुधार कर ली थी। अब केंद्र और राज्य दोनों की सरकारें बहुत बुरी तरह स्थिति से निपट रही हैं।

चिदंबरम ने सुझाव दिया कि मौलिक समाधान कश्मीर की स्थिति का बड़े पैमाने पर सौदेबाजी और सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा सफलता है। कश्मीर का भारत में विलय जिन शर्तों पर हुआ था, उनके अनुसार यह अधिक से अधिक स्वयं वैकल्पिक अता की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके विचार में वर्तमान केंद्र और राज्य सरकारों का रवैया गलत है।

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