Wednesday , October 18 2017
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पुराने शहर में पीने के पानी की सरबराही अबतर ,शिकायतें बेअसर

मौसम-ए-गर्मा के आग़ाज़(शरुआत) के बाद से ही पानी जैसा बुनियादी मसला एक मुस्तक़िल (हमेशा के लिये) सर दर्द बना हुआ है , पानी के हवाले से अगर ये कहा जाय कि पुराने शहर के बाअज़ इलाक़े में नफसा नफ़सी का आलम है तो ग़लत ना होगा।

मौसम-ए-गर्मा के आग़ाज़(शरुआत) के बाद से ही पानी जैसा बुनियादी मसला एक मुस्तक़िल (हमेशा के लिये) सर दर्द बना हुआ है , पानी के हवाले से अगर ये कहा जाय कि पुराने शहर के बाअज़ इलाक़े में नफसा नफ़सी का आलम है तो ग़लत ना होगा।

मगर हैरत और अफ़सोस की बात ये है कि इस हवाले से ज़राए इबलाग़(मिडिया) के ज़रीया मुसलसल तवजा देहानी के बावजूद मुताल्लिक़ा महिकमा के आला ओहदेदारों पर कोई असर नहीं हो रहा है। ख़ास कर चन्दू लाल बारहदरी फिल्टर से सरबराह किए जाने वाले इलाकोंमें ये सूरत-ए-हाल काफ़ी संगीन है।

मुक़ामी अफ़राद के मुताबिक़,इलाक़ा उसमान बाग़ ,बंडल गौड़ा कम्यूनिटी हाल के बाज़ू और क़ुरब ज्वार जैसे(नजदिकी) इलाकोंमें पिछले एक महीने से पीने के पानी के हवाले से कई एक मसाइल का सामना करना पड़ रहा है ।

बताया जाता है कि दीगर इलाक़ों के मुक़ाबले में अगरचे यहां एक दिन आड़ नल खोला जा रहा है मगर प्रैशर इस क़दर कम है कि लोगोंकी ज़रूरियात पूरी ही नहीं होपाती ।मुताल्लिक़ा इलाक़ों के मकीनों ने नुमाइंदा सियासत से ये शिकायत की के , पिछले एक माह से प्रैशर इस क़दर कम रखा जा रहा है कि दो घंटे तक ज़रूरत की तकमील (पूरी)नहीं हो पाति, जबकि प्रेशर ठीक होने की सूरत में इस तरह की सूरत-ए-हाल पैदा नहीं होती ।

बंडल गौड़ा ,उसमान बाग़, का माटी पूरा के मकीनोंने बताया कि यहां पानी के प्रैशर का ये हाल है कि यहां मोटर के ज़रीया पानी खींचना पड़ता है और अगर नल खुलने के वक़्त बर्क़ी (बिजली)भी मुनक़ते(कट) हो जाए तो शायद ही किसी को पानी मिल सके ।हालाँकि मुक़ामी अफ़राद के मुताबिक़ इस हवाले से मुताल्लिक़ा महिकमा के ज़िम्मेदारों से कई बार शिकायत की गई है मगर मुताल्लिक़ा ज़िम्मा दारों की रिवायती लापरवाही और बे हिसी से मसला जूं के तूं बरक़रार है ।

उसमान बाग़ की साकिन सयदा राबिया का कहना है कि काफ़ी इंतिज़ार के बाद किसी तरह अगर नल खोला भी जाता है तो प्रेशर इंतिहाई कम होने की वजह से वो अपनी ज़रूरत का आधा पानी भी हासिल नहीं कर पा रही हैं। दूसरी तरफ़ कुनटाल शाह र ,सैफी कॉलोनी से ताल्लुक़ रखने वाले इबरार का कहना है कि उनके इलाक़े में भी चन्दूलाल बारहदरी से पानी की सरबराही अमल में आती है

ताहम चार पाँच दिन हो जाने के बाद भी अगर मुताल्लिक़ा महिकमा के ज़िम्मेदारों से शिकायत की जाती है तोकोई मुनासिब जवाब नहीं दिया जाता, सिर्फ एक ही बात बोलते हैं ,ठीक है ,कि वो लाइनमैन से मालूम करेंगे ,लाइनमैन को बोल देंगे मगर लाईन मैन अपनी रिवायती हट धर्मी पर बदस्तूर क़ायम है ।

बताया जाता है कि लोग जब परेशान होकर मुताल्लिक़ा महिकमा में जा कर ज़रा सख़्ती से शिका यत की जाय तो वो मुख़्तलिफ़ तावीलात(बहानो) के ज़रीया टाल मटोल से काम लेते हैं ,आज लाइनमैन नहीं है , कल भेज दूंगा,पानी का बिल साथ लाए क्या ? आपके घर का नंबर किया है ? बिल अदा करे यह नहीं ? ।

दिलचस्प बात ये है कि मुताल्लिक़ा ओहदेदार इन इल्ज़ामात से यकसर इनकार कर रहे हैं ।नुमाइंदा सियासत ने इस हवाले से जब चन्दूलाल बारहदरी के ओहदेदार से बात की तो उनका कहना था चार पाँच दिन बाद नल खोलने की शिकायत बिलकुल ग़लत है ,उनके मुताबिक़ हर दो दिन बाद नल पाबंदी से खोला जा रहा है।

मज़ीद यक़ीन दहानी केलिए उन्होंने कहा कि अगर आप चाहें तो लोकल लीडरों से मालूम कर सकते हैं,मसला ये है कि लोकल लीडरों का ताल्लुक़ मुक़ामी जमात से है और वह इस बारे में क्या जवाब देंगे ये सब को मालूम है।

इसलिए मुक़ामी अवाम ने मुताल्लिक़ा ओहदेदारों से मुतालिबा किया है कि वो उनकी या लाइनमैन की बातों पर भरोसा करने के बजाय नल खुलने के दिन कभी अचानक मुताल्लिक़ा इलाक़े के दौरा करके देखें कि आया वाक़ई नल खोला गया या नहीं ?

अवाम ने इन से मुतालिबा किया है कि वो जल्द से जल्द इस मसले पर तवज्जा देते हुए अवाम की परेशानियों को दूर करने की कोशिश करें अगर पानी की कमी है तो कम-अज़-कम दो दिन में तो एक बार पानी की सरबराही ज़रूर अमल में लाई जाय ताकि अवाम को परेशानीयों से नजात(छुतकारा) मिल सके ।

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