Tuesday , September 26 2017
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पुरी का जगन्नाथ मंदिर ‘हाई रिस्क’ पर कभी भी डह सकता है

पुरी : भारतीय पुरातत्व सर्वे का कहना है कि ओडीशा में पुरी का जगन्नाथ मंदिर कभी भी गिर सकता है. एएसआई की तकनीकी कोर समिति के सदर जीसी मित्रा ने कहा है कि ये मंदिर ‘हाई रिस्क’ पर है और अगर वक्त पर ज़रूरी कदम नहीं उठाए गए तो सदियों पुराना ये मंदिर ढह सकता है. यह कहते हुए उन्होंने अपने ओहदे से इस्तीफ़ा दे दिया है. मित्रा के इस बयान के बाद ओडीशा में हर तरफ़ इस मुद्दे पर बहस हो रही है. प्रदेश कांग्रेस समिति के सदर प्रसाद हरिचंदन ने मित्रा से अपना इस्तीफ़ा वापस लेने को कहा है.
इससे पहले रियासत के वजीरे आला नवीन पटनायक ने वजीरे आजम नरेंद्र मोदी को खत लिख कर दरख्वास्त किया कि मंदिर के जगमोहन अहाते को लेकर फौरन कदम उठाए जाएं. अपने खत में उन्होंने कहा कि एएसआई की हीलाहवाली की वजह से रियासत के लोगों और जगन्नाथ कल्चर के प्रेमियों की भावनाओं को ठेस लग रही है. उन्होंने कहा कि एएसआई काम तो शुरू करती है लेकिन वक्त पर उसे पूरा नहीं किया जाता है. पीर को नई दिल्ली में पेट्रोलियम वजीर धर्मेंद्र प्रधान के रिहाइशगाह पर हुई एक आला सतही  बैठक में केंद्रीय संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा, एएसआई के महानिदेशक और दिगर अफसरों ने इस मुद्दे पर चर्चा की. बैठक के बाद, महेश शर्मा ने कहा कि तकनीकी वजहों से जगमोहन की मरम्मत के काम में देरी हो रही है. उन्होंने कहा कि संस्कृति सेक्रेट्री की कियादत में एक टीम फौरन ओडीशा का दौरा करेगी.
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “मंदिर की मरम्मत के लिए पैसे की कमी नहीं होने दी जाएगी. आखिरकार ये जगन्नाथ संस्कृति के करोड़ों लोगों की भावनाओं का मामला है. रियासत के वजीरे आला का खत मिलने के बाद वजीरे आजम खुद इस मामले को देख रहे हैं.”

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