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पुलिस आम आदमी के लिए नहीं: दिल्ली उच्च न्यायालय

गरीब, आम आदमी के पास कोई आवाज नहीं है और पुलिस उन्हें भगा देती है क्योंकि उनसे कोई पैसा नहीं बनाया जा सकता है और कोई उप्पर से उनके लिए फ़ोन नहीं करेगा, दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज कहा ।

यह कटु अवलोकन तब आया जब अदालत में दो बच्चों की मां ने बताया की पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं करी जब वे उनके पास शिकायत लेकर गयी थी की उनके बच्चों को उनके पति और ससुराल वाले जबरन दूर ले गए हैं ।

“यह एक दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य है कि इस देश, इस शहर में एक गरीब, आम आदमी की कोई आवाज नहीं है। जब वह पुलिस स्टेशन जाता है तब पुलिस उसे भगा देती है क्योंकि वे उससे पैसे नहीं बना सकते और कोई ऊँची पद का अधिकारी उनके लिए कॉल नहीं करेगा ।

“आज पुलिस बल आम आदमी के लिए नहीं है। यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है,” न्यायमूर्ति विपिन सांघी और दीपा शर्मा की पीठ ने कहा।

महिला की याचिका के अनुसार, 15 अप्रैल को उन्हें अपने ससुराल से बाहर निकाल दिया गया था और वह अपनी मां के घर आ गयी थी।

चार दिन बाद, उसके पति और ससुराल वाले उसकी मां के निवास पर आए और जबरन उसके बच्चों को पंजाब में होशियारपुर ले गए।

उन्होंने दावा किया कि, उन्होंने उत्तरी दिल्ली के तिमारपुर पुलिस थाने में रिपोर्ट लिखाई थी लेकिन अधिकारियों ने उनकी बिकुल मदद नहीं करी।

बेंच ने पुलिस थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) को उस महिला की शिकायत पर कार्रवाई करने और पहले से एकत्रित जानकारी के तहत उनके बच्चों को ढूंढने का निर्देश दिया।

अदालत ने यह भी आदेश दिया की एसएचओ सुनिश्चित करें की अगली तारीख, 23 मई, को दोनों बच्चे, महिला के पति और ससुरालवाले जो याचिका में नामित हैं वे अदालत मे पेश हों।

महिला के दोनों बच्चो में एक आठ महीने का छोटा बच्चा है।

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