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पुलिस की मुबय्यना हरासानी, तालाब कट्टा में एक नौजवान की ख़ुदकुशी

पुराने शहर में पुलिस हरासानी और अज़ियत की एक दर्दनाक दास्तान मंज़र-ए-आम पर आई जहां एक नौजवान ने पुलिस की हरासानी और अज़ियत रसानी के आगे अपनी मौत को तरजीह देते हुए ख़ुदकुशी करली । 25 साला नौजवान मुहम्मद अक़ील एक गरीब ख़ानदान के गुज़

पुराने शहर में पुलिस हरासानी और अज़ियत की एक दर्दनाक दास्तान मंज़र-ए-आम पर आई जहां एक नौजवान ने पुलिस की हरासानी और अज़ियत रसानी के आगे अपनी मौत को तरजीह देते हुए ख़ुदकुशी करली । 25 साला नौजवान मुहम्मद अक़ील एक गरीब ख़ानदान के गुज़र बसर का वाहिद ज़रीया था जो उनपे बड़े भाईयों और वालिदा के साथ नशेमन नगर में रहता था । अक़ील अहमद एक संजीदा नौजवान था अपने घर और अफ़राद की ज़िम्मा दारीयों को बहुसन-ओ-ख़ूबी अंजाम दे रहा था । बीमार वालिदा को आए दिन डाइलसेस करवाना पड़ता है । इस मजबूर माँ के दोनों बेटों के ख़िलाफ़ पुलिस हरासानी बढ़ गई थी जबकि अक़ील अहमद के ख़िलाफ़ कम़्यूनल रूडी शीट खोली गई थी और आए दिन पुलिस की हरासानी का सिलसिला जारी था ।

अक़ील जो एक चप्पल की दूकान चलाता था दोस्तों में भी अपने बेहतर हुस्न-ए-सुलूक के लिए जाना जाता था लेकिन गुज़श्ता माह से इस नौजवान की तबियत में तबदीली वाक़ै होगई थी जिस को उसके करीबी साथियों ने भी नोट किया और वजहा जानी तो पता चला कि पुलिस मुसलसल उसे हरासां-ओ-परेशान कररही है जिस पर वो काफ़ी फ़िक्रमंद और रनजिदा था । जब जी चाहे गिरफ़्तार कर लेना और जब जी चाहे उसे रात भर हिरासत में रख कर अज़ियतें देना पुलिस का मामूल बन गया था । बताया जाता है कि शायद ये नौजवान अगर पुलिस की हिदायत के मुताबिक़ काम करने वाला होजाता तो उसे हरासानी की सूरत-ए-हाल का सामना ना करना पड़ता ताहम इस ने पुलिस की दोस्ती की बजाय ख़ुदकुशी जैसी चीज़ को तरजीह नहीं देता ।

वो नहीं चाहता था कि जिस तरह उसे झूटे मुक़द्दमा में फांसा गया और जिन हालात का उसे सामना करना पड़ा रहा है वैसी हालात किसी और मुस्लिम नौजवान के साथ पेश ना आएं । वो चप्पल की दुकान से अपने मकान जाता और पहले अपनी माँ की सेहत दरयाफ़त करता फिर बाद में कारोबार की और घर की फ़िक्र रहती । गुज़श्ता रोज़ चंद पुलिस नौजवान इस के मकान आए वैसे तो अक़ील अहमद की दूकान पर पुलिस का आना जाना लगा रहता था । कभी कोई जवान आता और कहता कि साहब याद कर रहे हैं और कभी अपने लिए और कभी अपने बीवी बच्चों के लिए अक़ील की दूकान से चप्पल लेकर चला जाता और ये पुलिस का मामूल बन गया था जिस से ना सिर्फ अक़ील की ज़हनी उलझनों में इज़ाफ़ा हो रहा था बल्कि उस की मआशी हालत को भी नुक़्सान होरहा था ।

एक तरफ़ घरेलू ज़िम्मेदारी और दूसरी तरफ़ अपने ख़िलाफ़ पुलिस की रूडी शीट से ये संजीदा नौजवान ज़हनी अज़ियत में मुबतला होगया था ।गुज़श्ता रोज़ जब चंद पुलिस मुलाज़मीन उसकी दूकान आए और उसे साथ ले गए वो पहली मर्तबा इस के यहां आए थे । मोतबर ज़राए ने ये बात बताई जिस का ज़िक्र उनसे ख़ुद अक़ील ने किया था और अपने आप को सी सी एस पुलिस ज़ाहिर करने के बाद वो अपने साथ ले गए और पुलिस हिरासत में उसे काफ़ी अज़ियत पहुंचाई गई । अक़ील ने अपने भाई और साथी से भी इस अज़ियत का ज़िक्र किया था और अपने एक साथी को इस के निशानात बताए थे ।अक़ील को चंद वीडियो क्लिपिंग दिखाई गई और उन में से चंद की निशानदेही करने के लिए कहा गया लेकिन इस ने पुलिस की हिदायत के मुताबिक़ नहीं किया ।

इस का मानना था कि जिस तरह एक वीडियो क्लिपिंग के बाद अक़ील के ख़िलाफ़ रूडी शीट खोली गई कहीं इस तरह से इस की निशानदेही से दूसरे नौजवानों को इन हालात का सामना ना करना पड़े जिस तरह से वो कर रहा है । अक़ील अहमद ने अपने भाई से कहा था कि भया ! मुझे पुलिस बहुत परेशान कर रही है और मुझे ये बिलकुल पसंद नहीं है कि मैं अज़ियतें बर्दाश्त करते हुए बेग़ैरती की ज़िंदगी गुज़ारूं । अक़ील की ज़िंदगी ज़मानत मंज़ूर हो जाने के बाद भी बेहतर अंदाज़ में जारी थी लेकिन पुलिस की हरासानी ने इस नौजवान को इस क़दर तंग कर दिया कि उस ने बिल आख़िर अपनी मौत को तरजीह देते हुए कल रात देर गए अपने मकान में फांसी ले ली और इस के क़बज़ा से चार ख़ुदकुशी नोट बरामद हुए हैं ।

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