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पुलिस के व्यवहार से क्षुब्ध होकर युवक ने आत्महत्या कर ली

रांची : प्रधानमंत्री कार्यालय और झारखंड के डीजीपी समेत कई वरीय अधिकारियों को सुसाइडल नोट भेजनेवाले युवक ने आत्महत्या कर ली है. गुरुवार सुबह सेवा सदन अस्पताल के सामने स्थित पार्किंग में एक पेड़ से उसका झूलता शव मिला. युवक ने दो गमछे की मदद से फांसी लगा ली. उसकी पहचान शिव सरोज के रूप में हुई है. पीएमअो और डीजीपी समेत अन्य अधिकारियों को भेजे गये अपने सुसाइडल नोट में उसने लिखा था कि चुटिया थाना की पुलिस के व्यवहार से क्षुब्ध होकर वह जान देने जा रहा है. उसने अपने पिता को पुलिस के जुल्म से बचाने की भी गुहार लगायी थी.

उसने अपने सुसाइडल नोट की कॉपी आइजी, निगरानी विभाग के आइजी, सीआइडी के आइजी, डीआइजी, रांची के एसएसपी और सिटी एसपी समेत कई अधिकारियों को भेजी थी. ई-मेल मिलने के बाद से पुलिस उसकी खोज कर रही थी. लेकिन, देर रात तक उसका पता नहीं चला. पुलिस ने उसके पिता से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका फोन स्विच ऑफ था. गुरुवार सुबह शिव सरोज का शव सेवा सदन अस्पताल के बाहर एक पेड़ की शाखा से लटकता मिला.

 पीएमओ और डीजीपी समेत वरीय अधिकारियों को भेजे गये ई-मेल में शिव सरोज ने आत्महत्या करने के कारणों के बारे में भी बताया था. उसने अपने सुसाइडल नोट में विस्तार से लिखा था कि 29 जुलाई, 2017 को वह एयर एशिया की फ्लाइट से दिल्ली से रांची आया था. उसे यहां पासपोर्ट संबंधी कुछ काम था. यहां वह होटल रेडियेंट में रुका. 30 जुलाई को वह खाना खाने निकला, तो काले रंग की स्कॉर्पियो में उसका अपहरण कर लिया गया.

उसे बेहोश कर उसके साथ लूटपाट की गयी. उसका सब कुछ लूटने के बाद उसे रांची स्थित बड़ा तालाब के पास बेहोशी की हालत में छोड़ दिया गया. पुलिस ने उसे मेडिका अस्पताल में भरती कराया. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने चुटिया थाना पहुंचा. उसे और उसके पिता को पुलिस ने प्रताड़ित किया.

शिव सरोज ने आगे लिखा कि चुटिया के थानेदार अजय कुमार वर्मा और सिटी डीएसपी शंभु कुमार सिंह ने उसके और उसके पिता के साथ ऐसे व्यवहार किया, मानो वे अपराधी हों. उसने लिखा था कि वह पुलिस के इस बर्बर व्यवहार से क्षुब्ध है और आत्महत्या करने जा रहा है.

उधर, बुधवार को सिटी डीएसपी शंभु कुमार सिंह ने कहा कि पूछताछ में युवक को अगवा कर लूटपाट संबंधी पूरी घटना संदेहास्पद प्रतीत हो रही है. मामले में हर बिंदु की जांच चल रही है. शिव सरोज जब थाना पहुंचा, तो उसने खुद को आइबी अधिकारी बताया था. इस संबंध में आगे जानकारी ली गयी, तो उसकी यह बात गलत साबित हुई. इसके बाद वह आगे कुछ बताये बगैर थाना से निकल गया.

उन्होंने बताया कि उसने अपने परिवार को भी बता रखा था कि वह आइबी ऑफिसर है. अपने पिता को तो असिस्टेंट आइबी ऑफिसर का नियुक्ति पत्र भी दिखाया था. पुलिस ने इस संबंध में उससे और प्रमाण मांगे, तो उसने इससे इनकार कर दिया और बाद में खुद को आइटी ऑफिसर बताने लगा.

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