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पुलिस जानती थी दिल्ली ब्लास्ट के आरोपी बेगुनाह है फिर भी रखा 3 साल जेल मैं

नई दिल्ली: साल 2005 में दिल्ली के सरोजिनी नगर, गोविंदपुरी और पहाड़गंज में दिवाली से पहले हुए बम धमाकों के आरोप में तीन कश्मीरी युवकों को गिरफ्तार किया गया था। इन बम धमाकों में 60 लोग मारे गए थे। लेकिन साल 2009 में दिल्ली पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो को कुछ सबूत मिले जिससे पता चला कि इन बम धमाकों में इनका हाथ नहीं बल्कि इंडियन मुज्जाहिद्दीन का हाथ था।

लेकिन फिर भी इस मामले में पुर्नजांच के आदेश नहीं दिए गए। इस मामले में गिरफ्तार मोहम्मद रफीक शाह और मोहम्मद हुसैन फाजिली को इस महीने की शुरुआत में बरी किया गया है जबकि तारीक डार को इस मामले में आतंकवाद को समर्थन देने के लिए आरोपी ठहराया गया था, लेकिन बाद में उसे बरी कर दिया गया था।

इसके साथ दो और हमले भी हुए थे। फरवरी 2005 में बनारस केअश्वमेध घाट पर बम धमाके करने के आरोप में इलाहाबाद के फूलपुर की मस्जिद में इमाम मोहम्मद वलीउल्ला को 10 साल की सजा हुई थी और वह अभी जेल में ही है। तीसरा मामला 2006 का जब मुंबई की लोकल ट्रेनों में बम धमाके किए गए थे।

मार्च 2009 में आंध्र प्रदेश पुलिस के एटीएस के सीक्रेट डोजियर से बात सामने आई है की ये तीनों हमले इंडियन मुजाहिद्दीन ने कराए थे, इन लोगों ने नहीं। संदिग्धों से पूछताछ के दौरान पता चला था कि दिल्ली के बम धमाकों का मास्टर माइंड इंडियन मुजाहिद्दीन का चीफ आतिफ आमीन जोकि बाटला हाउस एनकाउंटर में मारा गया। इस प्लान में उसके इंडियन मुजाहिद्दीन के तीन लोग मिर्जा शदाब बेग, मोहम्मद शकील और शाकिब निसार थे शामिल थे।

दिल्ली के पहाड़गंज में प्रेशर कुकर बम रखे थे। शदाब ने सरोजिनी नगर और शकील और शाकिब ने गोविंदपुरी में धमाके किए थे। इसके बाद सबसे पहले तारीक डार गिरफ्तार हुआ जिसने शाह और फाजली का नाम इन धमाकों से जोड़ दिया और वह गिरफ्तार कर लिए गए। हालांकि इस बात के सबूत कहीं नहीं पाए गए की ये तीनों इस में शामिल थे।

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