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पुलिस पर किशनबाग़ के अवाम की सख़्त ब्रहमी

पुराने शहर के इलाके किशनबाग़ में फ़िर्कावाराना फ़साद के दौरान जहां एक तबक़ा के तीन अफ़राद पुलिस फायरिंग में हलाक हुए वहीं इस पर सितम बालाए सितम ये कि पुलिस की मौजूदगी में अश्रार मुबय्यना तौर पर तेज़ धार तलवारें और दुसरे मोहलिक असलाह

पुराने शहर के इलाके किशनबाग़ में फ़िर्कावाराना फ़साद के दौरान जहां एक तबक़ा के तीन अफ़राद पुलिस फायरिंग में हलाक हुए वहीं इस पर सितम बालाए सितम ये कि पुलिस की मौजूदगी में अश्रार मुबय्यना तौर पर तेज़ धार तलवारें और दुसरे मोहलिक असलाह के साथ घूमते हुए हर तरफ़ तशद्दुद-ओ-तोड़ फोड़ का बाज़ार गर्म कररहे थे।

बिलख़सूस अर्श महल वो इलाक़ा है जहां अश्रार ने इंतिहाई बे रहमाना अंदाज़ में मुस्लिम तबक़ा से ताल्लुक़ रखने वाले अवाम को निशाना बनाया और उन के घरों को मुनज़्ज़म अंदाज़ में तबाह-ओ-बर्बाद कर दिया गया।

इस दौरान कैमरों में क़ैद की गई तसावीर से ये हैरतअंगेज़ सबूत मिलता हैके मुसल्लह पुलिस-ओ-सेक्यूरिटी फोर्सेस की मौजूदगी में अश्रार बड़ी तलवारें लेकर बला ख़ौफ़-ओ-ख़तर आज़ादाना तौर पर घूम रहे थे।

पुलिस ने उनके हाथों से तलवार लेने या उन्हें गिरफ़्तार करने की कोशिश नहीं की बल्कि अश्रार को मुंतशिर करने के नाम पर की गई फायरिंग में बेक़सूर मुस्लमान ही हलाक हुए जो परेशान हाल थे और अपने तहफ़्फ़ुज़-ओ‍बचाव‌ के लिए महफ़ूज़ मुक़ामात की तलाश में थे।

अर्श महल के अवाम मुसलमानों का हुकूमत और पुलिस से सवाल हैके आख़िर इन का क़सूर किया था , उनके तीन अफ़राद को क्युं हलाक कर दिया गया। सिखों के जिस झंडे से तनाज़ा पैदा हुआ इस के क़रीब वाक़्ये मकानात को लूट लिया गया और उनके मकान में मौजूद तीन गाड़ीयों के अलावा मकान को नज़र-ए-आतिश कर दिया गया। सितम ज़रीफ़ी का आलम ये हैके मुस्लमान बेयार-ओ-मददगार होगए और पुलिस ने अश्रार की मौजूदगी पर ख़ामोशी इख़तियार की। शरीफा बी के मकान के क़रीब एक दुकान को लूट लिया गया और जब शरीफा बी के शौहर मकान से बाहर निकले तो उन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार करलिया। शरीफा बी की रिश्तेदार ख़ातून ने बताया कि अश्रार की टोलियां जो शोर शराबा कररही थीं पुलिस की मौजूदगी में उनके मकानात पहूंचें और उन्हें मकानात से बाहर निकाल कर मार पिट् का निशाना बनाया।

अर्श महल बस्ती के अवाम ख़ौफ़ के आलम में ज़िंदगी बसर करने पर मजबूर हैं। ये एक मुस्लिम इलाक़ा है जहां मज़दूर पेशा अफ़राद की कसरत पाई जाती है और रोज़ाना की मेहनत मशक़्क़त उनकी ज़िंदगी के गुज़र बसर का ज़रीया है।

फ़साद के बाद नाफ़िज़ कर्फ़यू और एसे हालात पैदा होगए कि बस्ती वाले अपने ज़ख़मी रिश्तेदारों से तक मुलाक़ात नहीं करसके। अर्श महल के अवाम ने मीडीया पर भी सख़्त नाराज़गी का इज़हार किया और आला पुलिस ओहदेदारों की आमद और सियासी क़ाइदीन की इलाके में सरगर्मीयों पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की और कहा कि बस्ती उजड़ने के बाद ये लोग मय्यत उठाने आए हैं, उन्होंने सवाल किया कि हमारी बर्बादी के वक़्त तुम कहाँ थे और अब इस बर्बादी का तमाशा देखने आए हैं।

हथियारों से नहत्ते अवाम पर जब अश्रार हमला कररहे थे तो पुलिस उनके हमराह क्युं मौजूद थी?। अर्श महल के अवाम ने शिकायत की कि इस इलाके में बर्क़ी के एक फ़ीस को बंद कर दिया गया और उन्होंने इस बात के ख़ौफ़ का इज़हार किया कि रात में उनके साथ ना जाने क्या होगा?। अर्श महल इलाके में बैचैनी पाइ जारही है।

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