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नक्सलियों से नहीं साहब, RSS और बजरंग दल से डर लगता है: पुलिस ने बयां किया दर्द

picture: hindi.catchnews.com/

बलाघाट: जंगलों में नक्सलियों से लोहा लेने वाले योद्धा पुलिसकर्मी और उनके परिजन भयभीत हैं। उन्हें नक्सलियों से नहीं बल्कि आरएसएस से डर लगता है. मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में पिछले दिनों बीहर थाना क्षेत्र में मुस्लिम पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद आरएसएस प्रचारक की गिरफ्तारी के मामले में आईजी, सपा और ए एस पी सहित उच्च पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद पूरा विभाग ही भयभीत है। सोशल मीडिया पर मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करनेवाले आरएसएस नेता के खिलाफ कार्रवाई करने पर पुलिस पर ही सरकार ने हत्या की कोशिश, लूट, जोर-बर्दस्ती करने और आपराधिक धमकी देने जैसे कई संगीन आरोप मढ़ दिए हैं. डीजीपी को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि पुलिस अधिकारी नक्सलियों से ज्यादा आरएसएस के कार्यकर्ताओं से डरते हैं.

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उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में आरएसएस प्रचारक सुरेश यादव को गिरफ्तार किया गया था। सुरेश की गिरफ्तारी के बाद से ही बालाघाट जिले का माहौल गर्म है। इस मामले में पुलिस कर्मियों के खिलाफ निलंबन, तबादले और एफआईआर की कार्रवाई के बाद से ही अंदर ही अंदर पूरा विभाग भयभीत है।
ए एस पी राजेश शर्मा सहित पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित करने के बाद उनके खिलाफ जानलेवा हमला (आईपीसी की धारा 307) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा आरएसएस के दबाव के कारण आईजी डीसी सागर और एस पी अस्त यादव का भी तबादला कर दिया गया है।
परिजनों ने खोला मोर्चा
न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार बीहर मामले में राज्य सरकार और पुलिस के अलावा अधिकारियों की कार्रवाई के बाद पुलिसकर्मियों के परिजनों का दर्द सामने आया है। पुलिस के परिजनों ने आईजी जी जनार्दन को ज्ञापन सौंप कर न्याय की गुहार लगाई है. परिजनों का कहना है कि अब नक्सलियों से कम पुलिस वालों को आरएसएस, बजरंग दल, गौ रक्षक समिति और भाजपा के कार्यकर्ताओं से अधिक डर लगने लगा है। ऐसी स्थिति में कैसे कानून का राज स्थापित किया जा सकेगा?
आईजी को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि मामले की गंभीरता के मद्दे नज़र ए एस पी ही अपने स्टाफ के साथ कार्रवाई के लिए पहुंचे और सुरेश को पूछताछ के लिए थाने चलने के लिए कहा गया, सुरेश और उसके साथियों ने पुलिस कर्मियों के साथ बदतमीजी की, फिर भी पुलिस अधिकारी विरोध की परवाह किए बिना अपने कर्तव्य को अंजाम देते हुए सुरेश को थाने ले आए। सुरेश के साथ थाने आए साथियों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी की और सुरेश को भागने में मदद की। सुरेश पलायन होकर एसआईटी के घर पहुंच गया। पुलिस ने उसका पीछा करके गिरफ्तार किया, तो उसने धमकी दी कि तुम लोग नहीं जानते कि तुमने किस पर हाथ डाला है। हम लोग प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक को कुर्सी से हटा सकते हैं।

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