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पुलिस हिरासत में साल 2009 से 2015 के बीच 600 लोगों की मौत हुई: ह्यूमन राइट्स वॉच

प्रतीकात्मक तस्वीर

मानवाधिकार संगठन ने कहा है कि साल 2009 से 2015 के बीच पुलिस हिरासत में भारतीय जेलों में लगभग 600 लोगों की मौत हुई है। मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने यह बात अपने 114 पेज की एक रिपोर्ट में कही है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान हिरासत में लेकर प्रताड़ित करने के बावजूद किसी भी कैदी की मौत के लिए एक भी पुलिसवाले को दोषी करार नहीं दिया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस अक्सर हिरासत में हुई मौतों की वजह बीमारी,  कैदीयों द्वारा भागने की कोशिश, खुदकुशी और दुर्घटना बताती है, पर  मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि ज्यादातर मौतें हिरासत में रखकर प्रताड़ित करने के कारण होती है।

दूसरी तरफ सरकारी पक्ष ने मानवाधिकार संगठन के इस आरोप को गलत बताया है। लेकिन मानवाधिकार संगठन के इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2009 से 2015 के बीच हुई सिर्फ 17 मौत को गहन पड़ताल करने की बात कही गई है। वहीं मानवाधिकार संगठन का कहना है कि उसने यह रिपोर्ट पीड़ित परिवारों के लोगों, गवाहों, कानून के जानकारों और पुलिस अधिकारियों के मिलकर 70 इंटरव्यू करने के बाद तैयार किया है।

ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि जिन 17 मामलों का जिक्र रिपोर्ट में उसने किया है उसमें से किसी एक के भी केस में पुलिस ने गिरफ्तारी की वाजिब प्रक्रिया को नहीं अपनाई थी, जिससे संदिग्ध के साथ बदसलूकी होने की संभावना बढ़ गई थी। मानवाधिकार संगठन के इस रिपोर्ट से पता चलता है कि सरकारी आंकड़ों में 2015 के जिन 97 मौतों में से 67 का जिक्र किया गया है उसमें पुलिस ने या तो संदिग्ध को 24 घंटे के भीतर मेजिस्ट्रेट के सामने पेश ही नहीं किया या फिर संदिग्ध की गिरफ़्तारी के 24 घंटे के भीतर ही उसकी मौत हो गई।

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