Wednesday , September 20 2017
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पेलेट गन के गैर उपयोग पर अधिक मौतों की आशंका ‘सीआरपीएफ

श्रीनगर: सीआरपीएफ ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट को सूचित किया कि अगर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गनस के उपयोग पर पाबंदी लगा दी जाए तो बेहद स्थिति में उसके अधिकारी सीधे गोलियां दागने पर मजबूर हो जाएंगे और फिर अधिक जानी नुकसान हो सकता है। सीआरपीएफ ने हाईकोर्ट में की पेशकश की एक हलफनामे में कहा कि अगर पेलेट गनस को सीआरपीएफ उपलब्ध संभावनाओं से वापस लिया जाए तो सीआरपीएफ कर्मचारी बेहद मुश्किल स्थिति में राइफल से फायरिंग करने पर मजबूर हो जायेगा जिसके परिणाम में अधिक जानी नुकसान हो सकता है।

सीआरपीएफ ने हाईकोर्ट में जनहित एक आवेदन के जवाब में हलफनामे दाखिल किया है। जनहित याचिका में अनुरोध किया गया है कि कश्मीर घाटी में भीड़ पर काबू पाने के लिए एक प्रयास के रूप में पेलेट गनस के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए। कश्मीर घाटी में 8 जुलाई को हिजबुल मुजाहिदीन के एक कमांडर बुरहान वाणी की मौत के बाद से हालात बेहद बदतर हैं और वहाँ हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

बुरहान वाणी सेक्यूरिटी बलों के साथ झड़प में मारा गया था। सीआरपीएफ ने अपने हलफनामे में कहा कि पेलेट गनस को 2010 में पेश किया गया था और उसे गड़बड़ दूर करने के हथियार के रूप सेउत्तरदायी लिया गया था। उसका कहना था कि इस संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया को अपनाया गया था। कहा गया है कि लॉ एंड ऑर्डर की समस्या से निपटना मुश्किल होता है। जो मानक प्रक्रिया है तदनुसार कठिन परिस्थितियों में अगर आग्नेयास्त्रों इस्तेमाल किया जाता है तो फिर हथियार का निशाना कमर से नीचे होना चाहिए।

हलफनामे में कहा गया है कि घाटी में जो स्थिति है वह अलग है और स्थानांतरित होती जाती है। ऐसी स्थिति में कई बार गतिशील ‘दबते हुए और दौड़ते हुए निशानों पर नियमों के अनुसार निशाना लगाना मुश्किल हो जाता है। सीआरपीएफ ने अपने हलफनामे में कहा कि उसने 9 जुलाई से 11 अगस्ट से जुमला 3,500 पियालट गोलियां दागी हैं जबकि घाटी में हिंसा और प्रदर्शनों का सिलसिला चल रहा है।

जनहित यह आवेदन जम्मू कश्मीर बार एसोसिएशन की ओर से 30 जुलाई को दाखिल की गई है और इसमें बुधवार को सीआरपीएफ की ओर से जवाबी हलफनामे दाखिल किया गया है। सीआरपीएफ और बीएसएफ ने अपना जवाब अदालत में दाखिल कर दिया है लेकिन राज्य सरकार ने अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को तय की है।

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