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पैसा है तो आप महफ़ूज़ हैं: साबिक़ फ़ौजी सरबराह

नई दिल्ली, 25 दिसंबर: ( पीटीआई) साबिक़ फ़ौजी सरबराह जनरल वी के सिंह ने आज एक अहम बयान देते हुए कहा कि मुल्क के सदर मुक़ाम में एक लड़की की इजतिमाई इस्मत रेज़ि दरअसल कमज़ोर हुक्मरानी की अलामत है । उन्होंने कहा कि मुल्क की पुलिस सिर्फ़ अहम शख़्

नई दिल्ली, 25 दिसंबर: ( पीटीआई) साबिक़ फ़ौजी सरबराह जनरल वी के सिंह ने आज एक अहम बयान देते हुए कहा कि मुल्क के सदर मुक़ाम में एक लड़की की इजतिमाई इस्मत रेज़ि दरअसल कमज़ोर हुक्मरानी की अलामत है । उन्होंने कहा कि मुल्क की पुलिस सिर्फ़ अहम शख़्सियतों के तहफ़्फ़ुज़ की सेक्योरिटी एजेंसी बिन चुकी है ।

उन्होंने कहा कि पुलिस कितनी अहलीयत की हामिल है और उसकी कारकर्दगी क्या है इसका पर्दा तो इस्मत रेज़ि के वाक़िया के बाद फ़ाश हो गया । पुलिस का रवैय्या बिलकुल नामर्दों जैसा होता जा रहा है जिससे बस में सवार लड़की की ही इज़्ज़त-ओ-नामूस नहीं बल्कि मुल्क के दीगर अवाम भी इस ज़द में हैं ।

ये एक ऐसा वाक़िया है जिनसे दुनिया भर की तवज्जा अपनी जानिब मबज़ूल कर ली है और पूरी दुनिया में हिंदूस्तान की थू थू हो रही है । क्या महकमा पुलिस सिर्फ़ अहम शख़्सियतों की जागीर बन कर रह गया है । मिस्टर सिंह ने कहा कि उन्हें बार बार इस मुतास्सिरा लड़की का ख़्याल आता है भगवान उसको जल्द सेहतयाब करे और इसके अरकान ख़ानदान को इस दुख को झेलने की ताक़त दे ।

उन्होंने जेसीका लाल क़त्ल केस का भी तज़किरा किया जिसे कुछ अर्सा गुज़र जाने के बाद फ़रामोश कर दिया गया । उन्होंने कहा कि जेसीका लाल पर फ़िल्म बनाकर ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करने का तरीक़ा उन्हें समझ में नहीं आया ये तो अच्छा हुआ कि जेसीका लाल के अरकान ख़ानदान ने जान तोड़ कोशिश करते हुए क़ातिल को सज़ा दिलवाई वर्ना वही क़ातिल क़ानून का मज़ाक़ उड़ाते हुए एक बार फिर क़त्ल-ओ-ग़ारतगरी में मसरूफ़ हो जाता लेकिन अब इजतिमाई इस्मत रेज़ि के वाक़िया ने अवाम की रूह को झिंझोड़ दिया है ।

लिहाज़ा अब वक़्त आ गया है कि ख़ातियों से निमटने मूसिर क़ानूनी साज़ी की जाए क़बल इसके कि बहुत देर हो जाए । महकमा पुलिस का वजूद ही इसलिए है कि मुल्क में ला ऐंड आर्डर को क़ायम रखा जाए लेकिन आज सूरत-ए-हाल ये है कि पुलिस वाले सिर्फ़ वी आई पीज के शख़्सी मुहाफ़िज़ बन कर रह गए हैं जैसे मुल्क में वी वी आई पीज के इलावा और कोई आबाद नहीं है ।

दिल्ली के नाम निहाद वी वी आई पीज और मालदार तबक़ा महकमा पुलिस को अपनी जागीर समझता है । उन्होंने कहा कि मुल्क के शहरी और साबिक़ फ़ौजी होने के नाते वो ये चाहते हैं कि मुल्क में ला ऐंड आर्डर का एक ऐसा मूसिर निज़ाम तैयार किया जाए जिससे मुल्क के नौजवानों को मुल्क में अपना बेहतर मुस्तक़बिल नज़र आए ।

पुलिस और सेक्योरिटी एजेंसीयों को अपना काम करने की इजाज़त दी जाए । आज हमारे मुल्क में ये पैग़ाम आम हो चुका है कि अगर कोई अहमीयत की चीज़ है तो वो पैसा है चाहे आप के पास वो जायज़ तरीक़ा से आया हो या नाजायज़ तरीक़ा से । आप के पास पैसा है तो आप महफ़ूज़ हैं नहीं है तो समझ लीजिए आप गए काम से !

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