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पोलीस एक्शन में मुस्लमानों का ज़बरदस्त नुक़्सान

रियासत हैदराबाद के इंडियन यूनीयन में इंज़माम के मौक़ा पर जहां सरकारी तौर पर तक़रीब मनाई गई वहीं मस्जिद हिदी की इंतेज़ामी कमेटी के ज़ेर एहतेमाम(इन्तेजाम ) एक मुज़ाकरा (आपस )बउनवान पोलीस एक्शन और इस की हक़ीक़त मुनाक़िद किया गया ।

रियासत हैदराबाद के इंडियन यूनीयन में इंज़माम के मौक़ा पर जहां सरकारी तौर पर तक़रीब मनाई गई वहीं मस्जिद हिदी की इंतेज़ामी कमेटी के ज़ेर एहतेमाम(इन्तेजाम ) एक मुज़ाकरा (आपस )बउनवान पोलीस एक्शन और इस की हक़ीक़त मुनाक़िद किया गया ।

जनाब लाल मुहम्मद साहिब पेश इमाम मस्जिद की क़िरात कलाम पाक से कार्रवाई का आग़ाज़ (शुरू)हुव । जनाब सय्यद कलीम उद्दीन ने इफ़्तिताही कल्मत अदा करते हुए इन एहसासात का इज़हार किया के पोलीस एक्शन की हक़ीक़ी सूरत-ए-हाल से अदम वाक़फ़ियत की वजह से मिल्लत(मज़हब ) के नौजवानों में एहसास-ए-जुर्म पाया जाता है और वो अपने बुज़ुर्गों को इस केलिए क़सूरवार ( अपराधी )समझते हैं ।

इसी ग़लत फ़हमी को दूर करने केलिए इस मुज़ाकरा(आपसी बातचीत) का एहतिमाम किया गया है । जनाब ख़्वाजा मैन उद्दीन हाश्मी कौंसिलर बलदिया ने ख़िताब करते हुए पोलीस एक्शन के हालात पर तारीख के हवाला से तफ़सीली रोशनी डाली और बताया के ये मुस्लमानों के ख़िलाफ़ फ़िर्क़ा परस्तों और हुकूमत के चंद जीम्मेदार ओहदेदारों की यकतरफ़ा कार्रवाई थी जीस में दानिस्ता तौर(जन बुज ) पर मुस्लमानों को जानी-ओ-माली नुक़्सान पहोनचएआ गया ।

उन्हों ने कहा के जब हिंदूस्तान आज़ाद हवा तो ये मौजूदा शक्ल में नहीं था । तीन सौ से ज़्यादा छोटी छोटी रियासतों में बटा हुवा था । जीन को बाद में रफ़्ता रफ़्ता इंडियन यूनीयन में ज़म(तब्दील ) करलिया गया । इस तरह रियासत हैदराबाद का इंज़िमाम भी अमल में आया है । इस वाक़िया कोयाद किया जाता है ।मगर इस मौक़ा पर मुस्लमानों के नुक़्सानात का जीक्रऱ् नहीं किया जाता ।

नाजीम हलक़ा कारकुनान जमात-ए-इस्लामी हिंद जनाब अबदुलक़ुद्दूस ने अपने सदारती ख़िताब में कहा के रियासत हैदराबाद एक सैकूलर रियासत रही है जीस में बलालहाज़ मज़हब-ओ-मिल्लत सब के साथ यकसाँ (एक जैसा )सुलूक किया गया ।

इस पूरे दौर-ए-हकूमत में बीलावजह ज़्यादती के वाक़ियात नज़र नहीं आते । उन्हों ने कहा के रियासत हैदराबाद का इंज़िमाम कोई ग़ैरमामूली वाक़िया नहीं है , मगर उस को इस अंदाज़ में पेश किया जा रहा है जैसे के किसी ग़ासिब(ज़बरदस्ती ) दुश्मन से जंग करके इस रियासत को फ़तह किया गया हो ।

हालाँकि आज़ाद हिंदूस्तान में शुमाल मशरिक़ी रियासत सिक्किम का बहुत बाद में इंज़िमाम किया गया जिस का चर्चा नहीं किया जाता । उन्हों ने कहा के इस वक़्त मुल्क में जीतनी भी सयासी पार्टियों में मुस्लमान क़ाइदीन(लीडर) मौजूद हैं इन पार्टियों में इन की हदूद(हद) मुक़र्रर हैं किसी भी सयासी पार्टी हुकूमत में मुस्लिम लीडर चाहे कितने ही आली (ऊँचा)ओहदों( दर्जा ) से नवाज़े जाएं अगर वो मुक़र्ररा हदूद से तजावुज़(अपनी मर्ज़ी ) करते हैं तो उन को पीछे ढकेल दिया जाता है और उन की हौसलाशिकनी (हिमत तोडना )की जाती है ।

इस लिए मौजूदा दौर में मुस्लिम क़ियादत(हुकोमत ) को सिर्फ मिल्लत के मुअत का ख़्याल रखते हुए ही मुख़्तलिफ़(कई ) सयासी पार्टियों में काम करने की ज़रूरत है। जनाब अदालक़ेवम साबिक़ कौंसिलर बलदिया जनाब सय्यद ज़मीर ख़तीब और जनाब अबदुलबासित सदर बलदिया के इलावा जनाब ख़्वाजा मैन उद्दीन हाश्मी बतौर मेहमान ख़ुसूसी शरीक थे । जनाब अबदुलहमीद , महमूद अली कुरैशी , मुहम्मद मज़हर अली के इलावा बिरादरान मिल्लत की कसीर(जियादा) तादाद शरीक थी । जनाब सय्यद कलीम उद्दीन ने निज़ामत के फ़राइज़ अंजाम दिए ।

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