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प्यार ने तोड़ दी जाति और धर्म की दीवार

गुजरात: एक अनूठी प्रेम कहानी प्रेम कहानी में एक लड़का और एक लड़की होती है लेकिन इस कहानी में जाति और धर्म की दीवार भी है जिसको इस युगल जोड़े ने दरकिनार कर एक महीना साथ गुजर किया। इसको दोस्ती का नाम दो या प्यार कह लो लेकिन इन्होंने वो कर दिखाया जिसको करने में लोहे के चबाने पड़ते हैं। कहानी के पात्रों में 19 साल की गैर मुस्लिम लड़की और 20 साल का मुस्लिम युवक है। इस संवेदनशील मामले में उच्च न्यायालय ने इस रिलेशनशिप की मंजूरी दी है और ‘मैत्री करार’ का समर्थन किया है।

कम उम्र होने के कारण दोनों अगले साल निकाह करेंगे। पूर्व में भी ऐसे मामले सामने आये लेकिन किसी ने अपना धर्म नहीं बदला था। यह प्रेम कहानी गुजरात के बनासकांठा जिले की है। कहानी की पात्रा लड़की एक छोटे से घर में रहती है जो हिज़ाब को अपना रही है। पहचान गुप्त रखते हुए यह युगल प्रेमी फिलहाल अपने परिवार के साथ रह रहा है। लड़के की मां ने उनके रिश्ते को मंजूरी दे दी है। उसका कहना है कि हमारा बेटा इस रिश्ते से खुश है इसलिए उन्हें कोई विरोध नहीं है। लड़की के धर्म से हमें कोई आपत्ति’नहीं है, साथ ही उम्मीद जताती हैं कि हमारे लड़के की पसंद एक अच्छी बहू साबित होगी।

लड़की का कहना है कि वह खुश है कि लड़के के परिजन उसे घर का सदस्य मानते हैं। साथ ही कहा कि खुद के परिवार अब उसके साथ नहीं हैं। रूआंसी होकर वह कहती है कि मेरे घर वालों का मेरी भावनाओं को समझना चाहिए था। इस प्रेम का आगाज उस वक़्त शुरू हुआ जब यह दोनों 13 एवम 14 साल के थे। गणित और साइंस की कोचिंग कक्षा के दौरान उनका प्यार परवान चढ़ा। इस प्यार के बारे में उनके स्कूल के प्रिंसिपल ने लड़की के माता-पिता को बताया था। इसके बाद परिवार वालों के विरोध दोनों ने कानूनी मार्ग का सहारा लिया और अदालत ने इनके रिश्ते को मैत्री करार दिया।

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