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प्रणब‌ मुकर्जी की ताईद

तृणमूल कोंग्रेस की सदर ममता बनर्जी ने सदारती उम्मीदवार प्रणब‌ मुकर्जी की हिमायत करने के लिए एक माह तक तजस्सुस पैदा कररखा था । उन के मौक़िफ़ में तबदीली के पीछे कई अहम राज़ होसकते हैं । मर्कज़ से उन्हों ने मुतालिबा किया था कि मग़रिबी बंगाल के लिए ख़ुसूसी प्य्केज‌ दिया जाय । अब इन का मुतालिबा पूरा हुआ है तो उन्हों ने सदारती उम्मीदवार पर अपनी मर्ज़ी का महर सबुत करेंगी ।

गुज़शता माह डोक्टर ए पी जे अबदुलकलाम और दीगर दो नाम बतौर सदारती उम्मीदवार तजवीज़ करते हुए यू पी ए हुकूमत को तक़रीबन बोहरान जैसी सूरत-ए-हाल से दो-चार करदिया गया था । हुकमरान इत्तिहाद के मुफ़ाद में फ़ैसला करते हुए उन्हों ने ये भी कहा कि इस के सिवा कोई चारा नहीं है और वो किसी इन्फ़िरादी शख़्स की ताईद नहीं करेंगी ।

सदारती ओहदा पर फ़ाइज़ होने वाली शख़्सियत साबिक़ वज़ीर फ़ीनानस प्रणब मुकर्जी से ममता बनर्जी के हालिया अर्सा में सर्द-ओ-गर्म रवाबित रहे हैं । यू पी ए इत्तिहाद और अज़ीम तर क़ौमी मुफ़ाद को मद्द-ए-नज़र रख कर किया गया ये फ़ैसला अब अवाम के मुफ़ादात में किस हद तक दरुस्त है ये नताइज पर मबनी है ।

सदर जमहूरीया के इंतेख़ाब के लिए हुकमरान इत्तिहाद यू पी ए को एक ताबे शख़्स की ज़रूरत थी जो इस ने ये कमी पूरी करली । प्रणब‌ मुकर्जी हुकमरान पार्टी कोंग्रेस के वफ़ादार और सीनीयर सियासतदां हैं । आने वाले दिनों में कोंग्रेस को 2014 के आम इंतेख़ाबात के बाद के हालात के तैय्यारी करनी है ।

मुअल्लक़ पार्लीमैंट की सूरत में सदर जमहूरीया को ही अहम फ़ैसला करना होता है कि किस को तशकील हुकूमत की दावत दी जाय । दस्तूर य ओहदा की ज़िम्मेदारी को पूरी करने के साथ सदर जमहूरीया के दफ़्तर को एक रबर स्टैंप में तबदील करने की भी कोशिश होती है । ख़ासकर ऐसे वक़्त जब मुअल्लक़ पार्लीमैंट का वजूद अमल में आए तो वज़ारत अज़मी की कुर्सी के लिए मौज़ूं शख़्स का इंतेख़ाब करने का फ़ैसला सदर जमहूरीया को ही करना होता है ।

अक्सरीयती पार्टी की क़ियादत करनेवाली मुंतख़ब शहसीत को तर्जीह देनी होती है । कोंग्रेस पार्टी की सरबराह सोनीया गांधी को 2004 के इंतिख़ाबात के बाद से ही पार्टी को मज़बूत करने की फ़िक्र है । लेकिन उन्हों ने अब तक अपनी पार्टी की जानिब से कोई भी एक बड़ा मआशी इस्लाहात का क़दम नहीं उठाया । लेकिन वज़ीर फ़ीनानस प्रणब‌ मुकर्जी ने आलमी कसादबाज़ारी को नज़रअंदाज करके मुल्क में पैदावार का निशाना 8 फ़ीसद मुक़र्रर किया और अफ़रात-ए-ज़र पर क़ाबू पाने का वाअदा भी किया लेकिन सरमाया मार्किट बतदरीज तबाही की जानिब बढ़ती गई इस लिए हाल ही में सदर अमरीका बारक ओबामा को ये तल्ख़ रेमार्क करना पड़ा कि हिंदूस्तान की मआशी मार्किट तबाह या कमज़ोर होचुकी है ।

इंदिरा गांधी के सयासी स्कूल के आख़िरी तालिब-ए-इल्म की हैसियत रखने वाले प्रणब‌ मुकर्जी को अब सदारती ज़िम्मेदारी निभाने के साथ सयासी वफ़ादारियों का भी मुज़ाहरा करना है ।प्रणब मुकर्जी हमेशा कोंग्रेस हाईकमान के मज़बूत सिपाही बन कर रहे हैं । वज़ारत अज़मी के मसला पर जब सोनीया गांधी को बैरूनी नज़ाद मसला का सामना था तो प्रणब‌ मुकर्जी को अहम ओहदा के लिए मुंतख़ब किया जाने वाला था लेकिन सोनीया गांधी ने मनमोहन सिंह को वज़ारत अज़मी के लिए नामज़द किया तो परनब मुकर्जी ने अपने बॉस की मर्ज़ी को तस्लीम क्या ।

2009 में कोंग्रेस के दुबारा इंतेख़ाब के बाद प्रणब‌ मुकर्जी को दुबारा वज़ीर फ़ीनानस बनाया गया । कोंग्रेस के लिए ज़रूरी था कि वो मुल़्क की मईशत को बेहतर बनाने माहिरीन की ख़िदमात हासिल करे । प्रणब‌ मुकर्जी को वज़ारत फीनास की ज़िम्मेदारी देने के बाद मुल्क में एक के बाद अस्क़ामस रौनुमा हुए तो हुकमरान पारी का सयासी ग्राफ़ ख़तरे में पड़ गया ।

मौजूदा सयासी हालात के पेशे नज़र कोंग्रेस को आम इंतेख़ाबात 2014 में दुबारा कामयाबी के लिए कई चैलेंजस का सामना करना है । इस लिए सदारती ओहदा के लिए एक वफ़ादार उम्मीदवार का होना लाज़िमी था । प्रणब‌ मुकर्जी की सदारती उम्मीदवारी और कामयाबी को यक़ीनी बनाने के लिए कोंग्रेस ने तृणमूल कोंग्रेस की सरबराह ममता बनर्जी से उन की ख़ुशी मुस्तआर ली है तो इस के इव्ज़ सरकारी ख़ज़ाने पर कितना बोझ डाला गया ये राज़ एक दिन बाहर आएगा ।

सौदेबाज़ी की सियासत से मलिक के मुफ़ादात को जिस तरह नुक़्सान पहूँचा या जा रहा है इस का ख़मयाज़ৃ अवाम भुगत रहे हैं । बज़ाहिर ममता बनर्जी ने प्रणब‌ मुकर्जी के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई को एक माह तवील खींचने के बाद कोंग्रेस के साथ अपनी जंग में नाकामी को महसूस करते हुए सदारती उम्मीदवार को वोट देने का फ़ैसला किया ।

कोंग्रेस की हिमायत करनेवाली ताम हलीफ़ पार्टीयों में से तृणमूल कोंग्रेस ने ही मसला पैदा किया था । अब सयासी तौर पर सब कुछ दरुस्त हो गया है तो नायब सदर जमहूरीया हामिद अंसारी को भी तृणमूल कोंग्रेस के ताईद हासिल होगी । सदारती इंतेख़ाब में हुकमरान इत्तिहाद यू पी ए की कामयाबी से मुल़्क की सयासी मआशी सूरत-ए-हाल में किसी बड़ी तबदीली की तवक़्क़ो भी नहीं की जा सकती । क्यों कि कोंग्रेस में या इस के इत्तिहादी ग्रुप में साल बह साल से मौजूद ताक़त , इख़तियार-ओ-इक़तिदार और मुराआत का मर्कज़ एक ह्यह्य और वो हाईकमान है ।

इसी मर्कज़ कुमलक की सयासी , मआशी हालत बेहतर बनाने की फ़िक्र करनी है । प्रणब‌ मुकर्जी की कामयाबी नायब सदर जमहूरीया हामिद अंसारी को दुबारा मुंतख़ब करने की ज़िम्मेदारी पूरी करनेवाली कोंग्रेस की मर्कज़ी क़ियादत के ज़िम्मा मुल़्क की मईशत में भी बेहतर लाना है । प्रणब‌ मुकर्जी एक सुलझे हुए सियासतदां हैं तो उन्हें अपनी दस्तूरी ज़िम्मेदारीयों के साथ साथ मुल्क में अहम सयासी मआशी समाजी इस्लाहात के लिए भी दस्तूरी फ़राइज़ की तकमील करनी होगी ।

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