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प्रधानमंत्री दलितों का दर्द देख सकते हैं, लेकिन मुसलमान का नहीं- शायर मनव्वर राणा

उर्दू के जाने माने शायर मनव्वर राणा जिन्होंने एक साल पहले खुद कहा था की वो ख़ुशी से मोदी के जूते भी उठा सकते है, अब उन्होंने मोदी की घोर निंदा करते हुए कहा की प्रधानमंत्री दलितों का दर्द महसूस करते हैं लेकिन मुस्लिम की पुकार सुनने में असमर्थ है।

पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा की हमारे प्रधानमंत्री दलितों का दर्द देख सकते हैं। लेकिन मुसलमान जो बहुत ही भयानक स्तिथि में जी रहे हैं उनकी पुकार सुनने में वो असमर्थ हैं। कल ऑल इंडिया मुशायरे में अपनी शायरी के द्वारा मुनव्वर राणा ने पाकिस्तान और भारत के मैत्रीपूर्ण सम्बंधों पर टिप्पणी की।

इंडो-पाक बॉर्डर के तनाव की तरफ इशारा करते हुए राणा ने कहा की सांस्कृतिक आदान प्रदान होना चाहिए, हमे पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में प्रस्तुति करने देना चाहिए। दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण सम्बन्धो को बेहतर बनाना ज़रूरी है। आगे उन्होंने कहा की भारतीय सेना को राजनीती से अलग रखना चाहिए, सेना को राजनैतिक फायदे के लिए प्रयोग नहीं करना चाहिए।

पुलिस एन्कोउन्टर पर अपनी राय व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा की ज़्यादातर एनकाउंटर फ़र्ज़ी होते है, सिर्फ कुछ एनकाउंटर ही सही होते हैं। भोपाल फ़र्ज़ी एनकाउंटर में मारे गए 8 सिमी सदस्यों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा की पहले पुलिस ने निर्दोष लोगों पर अवैध हथ्यार रखने का और नशीली एवम् मादक पदार्थ बेचने का आरोप लगाया, अब उनको आतंक फैलाने के मामले में फसाया गया।

राणा ने आगे कहा की वो अब भी सरकार से कोई पुरस्कार ना लेने की बात पर खड़े हैं और कभी उन्होंने कुछ भी पुरस्कार के लिए नहीं लिखा है।
उन्होंने कहा असहिष्णुता के मुद्दे पर सभी लेखकों और कवियों के अपने पुरस्कार वापस लौटाने का फैसला सही था। राणा उन 50 लेखकों में से एक हैं जिन्होंने कनाडा लेखिका एमएम कुलबर्गी की हत्या एवम् दादरी के बीफ काण्ड पर साहित्य अकादमी पुरुस्कार वापस किये थे। पुरस्कार वापस लौटाते हुए राणा ने कहा की भविष्य में कभी वो सरकार से कोई भी पुरस्कार नहीं लेंगे।

हालाँकि इससे पहले राणा ने लखनऊ मीडिया से कहा था की अगर नरेंद्र मोदी उनको बड़े भाई की हैसियत से आमन्त्रित करेंगे तो वो उनके जूते भी उठा लेंगे।वो मेरे लिए बड़े भाई जैसे हैं, और मेने अपनी शायरी में कहा है की बड़े भाई के प्यार के लिए में उसका जूते भी ख़ुशी से उठा लूंगा।

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