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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को लेकर खादी ग्रामोद्योग के कर्मचारी दो खेमे में बंटे

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर खादी ग्रामोद्योग आयोग के वर्ष 2017 के कैलेंडर छपने के बाद विपक्ष ने सरकार पर महात्मा गांधी का अपमान करने के आरोप लगाए थे | लेकिन  अब खादी ग्रामोद्योग के कर्मचारी तस्वीर को लेकर दो खेमे में बंटे नजर आ रहे हैं|

खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अधिकारी महात्मा गांधी के बजाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर 2017 की डायरियों और कैलेंडरों में लगाने के कदम का समर्थन कर रहे हैं| लेकिन शिवसेना सांसद आनंदराव अडसुल के नेतृत्व में खादी ग्रामोद्योग कर्मचारी सेना (केजीकेएस) चाहती है कि केवीआईसी की सभी डायरियों और कैलेंडरों पर महात्मा गांधी की तस्वीर होनी चाहिए|

केवीआईसी के 2,800 कर्मचारियों के 26 जनवरी से प्रस्तावित आंदोलन के विरोध में इस कदम का समर्थन कर रहे अधिकारी  खड़े हो गए हैं| आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना को पत्र लिखकर केवीआईसी अधिकारी संघ के लगभग 300 सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई है | उन्होंने कहा है कि संस्था को इस मामले का राजनीतिकरण कर बदनाम किया जा रहा है|

संस्था के महासचिव बाबुल मंडल की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि केवीआईसी को किसी तरह के सर्टिफ़िकेट की शरारती तत्वों और संस्था विरोधी तत्वों से जरूरत नहीं है |  आयोग के अध्यक्ष के साथ अधिकारी एकजुटता से खड़े हैं| मंडल ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है| ये केवीआईसी और गांवों में रह रहे कारीगरों के लिए सही नहीं होगा | उन्होंने कहा कि हमे इससे बहुत दुःख हुआ है इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाने की जररूत है |

केवीआईसी के इस कदम की कई प्रमुख राजनीतिक दलों और भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने आलोचना की है|  इसके साथ ही महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने भी इसकी निंदा की है|

केजीकेएस ने केवीआईसी के इस कदम के विरोध में 12 जनवरी को हुए मौन प्रदर्शन में हिस्सा लिया था | इस मौन प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए कर्मचारियों के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की है| कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर केवीआईसी ने किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की, तो राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी |

 

 

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