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प्राइवेट अस्पतालों पर ममता बनर्जी सख्त, कहा- ‘इलाज़ के नाम पर लूट नहीं चलेगी’

कोलकाता। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में यह एलान कर दिया है कि इलाज के नाम पर प्राइवेट अस्पतालों व नर्सिंग होम की लूट-खसोट नहीं चलेगी। बुधवार को टाउनहॉल में महानगर व आसपास के इलाकों में स्थित प्राइवेट अस्पतालों व नर्सिंग होम के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री स्पष्ट रूप से कहा कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों के इलाज में लापरवाही व मनमानी की जाती है। मरीजों से अधिक बिल वसूला जाता है। यहां तक कि पैसे नहीं दिये जाने पर अस्पताल प्रबंधन परिजनों को शव तक ले जाने नहीं देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह काफी दिनों से प्राइवेट अस्पतालों के साथ इन मुद्दों पर बैठक करना चाहती थीं। सीएमआरआइ की घटना के बाद यह बैठक जरूरी हो गयी थी। उन्होंने कहा कि किसी की मौत पर परिजनों का दुखी होना स्वाभाविक है, पर कानून हाथ में लिये जाने का समर्थन नहीं किया जा सकता है। हमारे यहां बांग्लादेश, नेपाल, बिहार, उत्तर पूर्व से काफी लोग इलाज के लिए आते हैं।

नर्सिंग होम वालों को यह ध्यान में रखना होगा कि यह ईंट व लकड़ी का व्यवसाय नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने का काम है। सेवा को कभी बेचा नहीं जाता। मरीजों को मानवीय दृष्टि से देखना चाहिए। 20 प्रतिशत की जगह अगर 100 प्रतिशत कमाई करेंगे, तो यह सेवा नहीं, संपूर्ण व्यवसाय बन जायेगा।

सुश्री बनर्जी ने कहा कि राज्य में 2,088 नर्सिंग होम हैं. केवल महानगर में नर्सिंग होम की संख्या 370 है। हमलोगों ने 942 नर्सिंग होम में सर्वे करवाया था, जिसमें से 70 को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया। वहीं, 33 का लाइसेंस रद्द कर दिया गया। नर्सिंग होम वालों की लूट-खसोट से परेशान होकर पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर ने भी एक सर्वे करवाया था, जिसमें भी प्राइवेट अस्पतालों की काफी गलतियां सामने आयीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हद तो यह है कि स्वास्थ्य स्कीम के द्वारा जारी किये गये बीमा पर भी ये लोग मरीजों से पैसे वसूलते हैं। स्वच्छता व को-ऑर्डिनेशन का सख्त अभाव है। बिल बढ़ा कर लिया जाता है। यहां तक कि इलाज के बगैर भी बिल वसूलने की घटना नजर आती है। मरीजों पर महंगा टेस्ट करवाने के लिए दबाव डाला जाता है।

बगैर जरूरत मरीज को वेंटिलेशन व ऑपरेशन थियेटर में डाल दिया जाता है। इससे बड़ा अनैतिक काम और नहीं हो सकता है। मरीजों को उनके मामले का विवरण नहीं दिया जाता है। तय पैकेज पर एक्सट्रा पैकेज लेने का मामला भी सामने आया है।

मुख्यमंत्री ने टाउन हॉल में मौजूद अपोलो अस्पताल के प्रतिनिधि को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे अधिक शिकायत आप लोगों के खिलाफ हैं। यहां गैरजरूरी टेस्ट आम है। मरीजों व उनके परिजनों को तरह-तरह से परेशान किया जाता है. उन पर महंगा टेस्ट करवाने के लिए दबाव बनाया जाता है। 35-40 लाख रुपये का बिल बना दिया जाता है। इतना बिल तो फाइव स्टार होटल में रहने पर भी नहीं बनता है।

आखिर आम लोग लाखों रुपये बिल का भुगतान कैसे करेंगे। अपोलो अस्पताल के प्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री के इस विस्फोटक बयान पर कहा कि हम लोग साफ-सुथरा बिल बनाते हैं। चूंकि हम लोगों ने काफी महंगे यंत्र लगाये हैं और हमारा कुछ विशेष प्रोटोकॉल है, तो इसलिए हमारे यहां खर्च कुछ ज्यादा होता है।

मुख्यमंत्री बेलव्यू अस्पताल के प्रतिनिधि को लताड़ लगाते हुए कहा कि आपके यहां स्वास्थ्य परिसेवा का स्तर पहले के मुकाबले निम्न हो गया है। ऊपर से जिस प्रकार आप लोग मोटा बिल बना रहे हैं, उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं। इस पर बेलव्यू के प्रतिनिधि ने कहा कि हमारे यहां की नर्सें अक्सर दूसरे अस्पतालें में चली जाती हैं, जिससे हमारी स्वास्थ्य परिसेवा प्रभावित हुई है।

इसके बाद सीएमआरआइ अस्पताल की क्लास लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपके यहां मरीजों से काफी ज्यादा बिल लिया जाता है। जिससे वहां जानेवाले रोगियों व उनके परिजनों को काफी परेशानी होती है। पिछले दिन सीएमआरआइ में जो घटना हुई, वह ठीक नहीं थी, पुलिस ने एक्शन लिया है, पर आप लोग भी परिसेवा पर अधिक ध्यान दो।

रूबी अस्पताल को लताड़ लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपके यहां काफी चार्ज लिया जाता है, उसे ठीक करें। साथ ही आप के यहां मरीजों को उनके इलाज से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जाता है, जो ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री ने सबसे कड़ा प्रहार मेडिका अस्पताल पर किया, इस अस्पताल का प्रतिनिधि जब अपनी बात कहने के लिए खड़ा हुआ, तो मुख्यमंत्री ने उन्हें कहा कि आपके यहां किडनी रैकेट किस तरह चल रहा है।

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