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प्रेमचंद आज भी उतने ही प्रासंगिक: गुलजार

नई दिल्ली: साहित्य के साथ गुलजार के रिश्ते में मुंशी प्रेमचंद का सबसे अधिक प्रभाव रहा है और प्रख्यात कवि-गीतकार का मानना है कि एक सदी बीत जाने के बाद भी प्रेमचंद की कृतियांे ने अपनी प्रासंगिकता नहीं गंवाई है।

प्रेमचंद की कृतियों ‘गोदान’ और ‘निर्मला’ को स्क्रीनप्ले प्रारूप में आज पेश करने वाले 81 वर्षीय गुलजार ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों में दर्शाई गई समस्याएं आज भी मौजूद हैं। ‘‘ प्रेमचंद आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने वे स्वतंत्रता से पूर्व के समय में थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ उनके साहित्य, जिन चरित्रों का उन्होंने चित्रण किया, जिन समस्याओं के बारे में उन्होंने बात की, आज भी हम उनसे उबरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। चाहे वह गरीबी हो या जाति के आधार पर भेदभाव, ये चीजें आज भी हमारे समाज में हैं और स्थिति बद से बद्तर हुई है। ‘होरी’ और ‘धनिया’ अब भी हमारे गांवों में हैं।’’

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