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प्रोप्राइटरशिप्स, फर्म्स के लिए 18.5% टैक्स की तजवीज़

टैक्स के असास को वसीअ करने की ख़ातिर हुकूमत वाहिद मिल्कियती प्रोप्राइटरशिप्स और पार्टनरशिप फर्म्स पर 18.5 फ़ीसद मुतबादिल अक़ल्लतरीन टैक्स (MT) आइद करने की तजवीज़ रखती है, जो अक़ल्ल तरीन मुतबादिल टैक्स (AT) की जुदागाना शक्ल है। इस तजवीज़ के म

टैक्स के असास को वसीअ करने की ख़ातिर हुकूमत वाहिद मिल्कियती प्रोप्राइटरशिप्स और पार्टनरशिप फर्म्स पर 18.5 फ़ीसद मुतबादिल अक़ल्लतरीन टैक्स (MT) आइद करने की तजवीज़ रखती है, जो अक़ल्ल तरीन मुतबादिल टैक्स (AT) की जुदागाना शक्ल है। इस तजवीज़ के मुताबिक़ जिस का याददाश्त बराए फायनेन्स बिल 2012 में तज़किरा है, कारोबारी इदारा जात जैसे तन-ए-तनहा मिल्कियतें, शराकतदारी वाली कंपनीयों और अंजुमन अफ़राद को अक़ल्लतरीन टैक्स 18.5 फ़ीसद अदा करना पड़ेगा जो इस टैक्स मिनहाइयों से क़ता नज़र रहेगा जिनका वो इनकम टैक्स एक्ट की मुख़्तलिफ़ दफ़आत के तहत दावा पेश करते हैं।

नया टैक्स दरअसल नज़रिया म्याट की तौसीअ है, जो सिफ़र टैक्स अदायगी वाली कंपनीयों को टैक्स जाल के तहत लाने के लिए मुतआरिफ़ किया गया था। कंपनीयों को अपनी दस्तावेज़ात के मुताबिक़ महसला नफ़ा पर 18.5 फ़ीसद की शरह पर अक़ल्लतरीन टैक्स (एम ए टी) अदा करना पड़ेगा। सरचार्ज और एजूकेशंस को मल्हूज़ रखने के बाद म्याट की अमली शरह ज़ाइद अज़ 20 फ़ीसद हो जाती है।

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