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फर्जी एनकाउंटर पर सवाल करना देशद्रोह नहीं, सवाल नहीं करना देशद्रोह है

भोपाल जेल से कथिततौर पर फरार और इनकाउंटर में मारे गिराए गए सिमी के आठ सदस्यों के मुठभेड पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। पुलिस के बयानों और शिवराज सरकार के गृहमंत्री के बयानों में काफी विरोधास देखा जा रहा। सोमवार को एनडीटीवी के प्राईम टाइम में रवीश कुमार ने जब मध्यप्रदेश के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह से पूछा कि आखिर इतनी सुरक्षा में वो कैसे भागे तो उन्होंने काफी घुमा-फिराकर जवाब दिया। उन्होंने यह कहा कि भागने वाले आतंकियों ने लकड़ी और चमच से चाबी बनाई और जेल का ताला खोलकर फरार हो गए। उसके फिर उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा कि यह जांच का विषय है कि यह कैसे हुआय़। फर्जी मुठभेड़ का वीडियों को तकरीबन सभी चैनलों ने दिखाया। वीडियो फुटेज में यह साफ देखा गया कि कैसे एक सुरक्षाकर्मी मरे हुए लाशों पर गोली मार रहा है और कुछ लोग मोबाइल पर वीडियो बना रहे हैं।

ट्वीटर पर कई पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और राजनेताओं ने इस फर्जी मुठभेड़ पर सवाल उठाए। वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने अपने ट्वीट अकाउंट पर मुठभेड़ के बारे में टिप्पणी करते हुए लिखा कि भगवान जानता है कि मैं फर्ज़ी मुठभेड़ और परदे के पीछे के अभियानों के बारे में काफी कुछ जानता हूं। लेकिन अपने अनुभव से भी मुझे लगता है कि ये मुठभेड़ पुलिस के अनाड़ीपने से भरपूर है। इशरत मुठभेड़ से तुलना करें तो भी।_92163365_shekhar_gupta_tweet

इंडिया टुडे के पत्रकार राहुल कवल ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर लिखा कि फर्जी मुठभेड़ को उजागर करना राष्ट्रद्रोह नहीं है। आप जानते हैं कि एक मुठभेड़ फर्जी है तो उस पर सवाल नहीं उठाना देशद्रोह है।rahul-kaval

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सुबह में ही ट्वीट किया कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या ये लोग सरकारी जेल से भागे या फिर किसी योजना के तहत भगाए गए हैं। सुबह में ही कश्मीरी लेखक राहुल पंडिता ने ट्वीट कर भोपाल जेल के प्रशासनिक व्यवस्था पर तंज कसा। उन्होंने लिखा कि भोपाल सेंट्रल जेल आईएसओ प्रमाणीकृत है; यह कैदियों के सुरक्षित भाग निकलने के लिए उच्च सुरक्षा मानक है।

दूसरी तरफ एमआईएम नेता असदउद्दीन ओवैसी ने मीडिया rahul-panditaसे कहा कि सभी आठ लोग पूरे कपड़े पहने हुए थे। उनके पांव में जूते थे। कलाई में घड़ी और बैंड थे। उन्होंने बेल्ट भी पहनी थी। अंडरट्रायल अभियुक्तों को ये सब चीज़ें नहीं दी जातीं, तो फिर यह सब कैसे हुआ। ओवैसी ने कहा कि अगर जेल के सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे तो ये चिंता का विषय है। यह कैसे हो सकता है?

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा है कि आठों लोगों का दीपावली की रात फरार होना और फिर भोपाल के पास ही आठ-नौ घंटे तक छिपे रहना शक पैदा करता है।

एनडीटीवी ने भोपाल के पुलिस अधिकारी योगेश चौधरी के हवाले से एक ख़बर दी कि इन आठ अभियुक्तों के खिलाफ आतंकवाद, देशद्रोह और चोरी के मामलों में कोर्ट में मुकदमा चल रहा था और इन सभी को जेल के एक ही कमरे में बंद करके रखा गया था। सवाल यह है कि एक ही बैरक में सभी अभियुक्तों को एक साथ क्यों रखा गया?

इसके अलावा सवाल यह भी उठाया गया कि 35 से 40 फीट की ऊंची दीवार को चादर की मदद से फांदा जा सकता है। क्या चादरें इतना वज़न उठा सकती हैं? इसके अलावा अगर अभियुक्तों को भागना ही था तो वो रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड की ओर क्यों नहीं भागे, वे गांव की तरफ क्यों भागे है?

इस कथित मुठभेड़ में केवल एक के पास से चाकू निलते। मगर सवाल उठ रहा है कि वो हथियार कहां गए जिसका दावा पुलिस ने किया है। सवाल यह भी है कि आखिर पुलिस ने उन्हें ज़िंदा पकड़ने की कोशिश क्यों नहीं की, उन्हें मार क्यों दिया?

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