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फलस्तीन वालदैन बच्चों की नाश डीप फ्रीजर में रखने पर मजबूर

ग़ज़ा में इसराईल की बरबरीयत का सिलसिला जारी है। आलमी बिरादरी के दोग़ले पन और मुस्लिम ममालिक की बेहिसी के नतीजे में इसराईली फ़ौज के सफ़ाई हमलों में ताहाल 1800 से ज़ाइद फ़लस्तीनी जांबाहक़ होगए हैं। इन में कम अज़ कम 400 बच्चे हैं। एक दूसरी इत्ते

ग़ज़ा में इसराईल की बरबरीयत का सिलसिला जारी है। आलमी बिरादरी के दोग़ले पन और मुस्लिम ममालिक की बेहिसी के नतीजे में इसराईली फ़ौज के सफ़ाई हमलों में ताहाल 1800 से ज़ाइद फ़लस्तीनी जांबाहक़ होगए हैं। इन में कम अज़ कम 400 बच्चे हैं। एक दूसरी इत्तेला में इसराईली दरिंदगी का निशाना बन कर जाम शहादत नोश करने वाले बच्चों की तादाद 372 बताई गई है। इसराईली हुकूमत की शैतानियत पर हसब रिवायत ख़ामोशी इख़तियार करने वाले आलमी इदारा अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के सेक्रेटरी जनरल बांकी मौन में ऐसा लगता है कि इंसानियत का ज़रा सा जज़बा पैदा हुआ है तब ही उन्होंने रफ़ाह में अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के स्कूल पर इसराईली बमबारी को आलमी क़वानीन की सरिया ख़िलाफ़वरज़ी क़रार दिया।

ग़ज़ा की सड़कों पर नाशें बिखरी पड़ी हैं, एक तिहाई से ज़ाइद हॉस्पिटल तबाह होचुके हैं और जो हॉस्पिटल तबाही से बच गए हैं वहां ज़ख़मीयों को रखना तो दूर मर्दों (नाशों) को रखने की गुंजाइश नहीं। रफ़ाह में इसराईल की बमबारी के नतीजे में एक ही इमारत में दब कर 20 फ़लस्तीनी जांबाहक़ हुए।

इन में अलग़ोल ख़ानदान के 9 अफ़राद भी शामिल हैं। सब से तकलीफ़देह बात ये है कि ग़ज़ा के हॉस्पिटलों के मुर्दा ख़ाने नों में नाशों के अंबार लग चुके हैं। वहां मज़ीद नाशें रखने की गुंजाइश ही नहीं। ऐसे में नाशों को आइसक्रीम के फ्रीजर, फलों और तर्कारीयों के कोलर्स में रखा जा रहा है।

समाजी राबते की साईटस पर ऐसी दर्दनाक तसावीर सामने आई हैं जिन में फूल जैसे मज़लूम बच्चों की नाशों को एक घर के फ्रीजर में रखा गया है। घर के बच्चों की नाश इस घर के फ्रीजर में सिर्फ़ इस लिए रखें कि कहीं नाशों को नुक़्सान ना पहुंचे। एक कर बना वाक़िया है जिस से हर ज़ी हिस्सी इंसान की आँखों से आँसू रवां होजाते हैं।

दुनिया में शायद इसराईली दरिंदे ही ऐसे होंगे जो इंसानियत की इस तबाही पर फ़तह का निशान बना कर ख़ुशी का इज़हार कररहे होंगे। समाजी राबिता की साईट्स पर नोमोलूद शाइमा की तस्वीर भी लोगों को रुला रही हैं। इसराईली हमले में उसकी माँ जांबाहक़ होचुकी हैं और माँ की शहादत के दो दिन बाद भी शाइमा को भी अल्लाह अज़्ज़-ओ-जल ने शहादत के एज़ाज़ से नवाज़ा।

वाज़िह रहे कि 8 जुलाई को ग़ज़ा पर हमलों के आग़ाज़ से ताहाल इसराईली बमबारी में 8136 स्कूल, 24 हॉस्पिटल्स, 25 अम्बो लिनस, अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के 6 शेल्टरस तबाह हुए। ज़ख़मी होने वाले बच्चों की तादाद 3000 तक पहुंच गई है। बाक़ौल वज़ीर-ए-आज़म तुर्की तय्यब अरदगान के इसराईली वज़ीर-ए-आज़म हिटलर बन गए हैं।

इन में इंसानियत ख़त्म होचुकी है। इसराईली दरिंदगी से ही फ़लस्तीनी बच्चों की नाश आइसक्रीम फ्रीजर, घरों में इस्तेमाल होने वाले रेफ्रीजरेटर के फ्ऱेज़र और कोलर्स में रखी जा रही हैं। लड़ाई में 5 लाख फ़लस्तीनी बेघर हुए हैं। अदवियात-ओ-ग़िज़ाई अश्या की क़िल्लत है। 270000 शहरी अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के 9 शेलटरस में पनाह लिए हैं।

पानी की क़िल्लत आम है। ग़ज़ा में सिर्फ़ दो घंटे बर्क़ी सरबराही की जा रही है लेकिन दुनिया को फिसलतीनी बच्चों की चीख़ें सुनाई नहीं दे रही हैं। फ्रीजर‌ में रखी उनकी नाशें नज़र नहीं आरही हैं।

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